देश की प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शनिवार देर रात दो छात्र संगठनों के बीच तीखी झड़प की खबर सामने आई है। कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के हालिया बयान को इस विवाद की वजह बताया जा रहा है। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति पर अपना पक्ष रखा है।
प्रशासन ने अपने पक्ष में क्या कहा ?
जानकारी के मुताबिक, प्रशासन का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों के एक समूह ने कैंपस की कई इमारतों को कथित तौर पर बंद कर दिया था। आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्र सेंट्रल लाइब्रेरी के अंदर भी पहुंचे और जो छात्र आंदोलन में शामिल नहीं होना चाहते थे, उन्हें दबाव बनाकर शामिल करने की कोशिश की गई।
प्रशासन ने कहा कि 22 फरवरी 2026 की रात दो छात्र समूहों के बीच हाथापाई की घटना सामने आई, जिसे गंभीरता से लिया गया है। बयान में कैंपस में “अनियंत्रित व्यवहार” की निंदा करते हुए कहा गया कि सार्वजनिक संपत्ति और शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ABVP ने लगाया आरोप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने प्रेस वार्ता कर लेफ्ट संगठनों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बीते एक सप्ताह से कैंपस में जबरन विरोध और “लॉकडाउन” जैसी स्थिति बनाई गई है।
संगठन का आरोप है कि कुछ नकाबपोश लोग शैक्षणिक भवनों में घुसे, पढ़ाई कर रहे छात्रों को बाहर निकालने की कोशिश की और विरोध करने पर मारपीट की। एबीवीपी का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं को कमरों में बंद किया गया, महिला कार्यकर्ताओं को भी धमकियां दी गईं और पुलिस से मदद मांगनी पड़ी।
शांतिपूर्ण मार्च पर बाहरी तत्वों ने किया हमला
लेफ्ट समूहों ने दावा किया कि उनके शांतिपूर्ण मार्च के दौरान बाहरी तत्वों ने हमला किया। उनका कहना है कि कई छात्रों को चोटें आई हैं और स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी छात्र को नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर होगी।
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