जम्मू-कश्मीर विधानसभा का बजट सत्र 2025 आज से शुरू हो गया है। यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यह पहला बजट पेश होगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने विधानसभा को संबोधित करते हुए राज्य के दर्जे की बहाली और समावेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने इस बजट को केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतीक बताया।
राज्य के दर्जे की बहाली पर उपराज्यपाल का आश्वासन
अपने संबोधन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि सरकार की गंभीर मंशा है। सिन्हा ने कहा कि सरकार इस आकांक्षा के भावनात्मक और राजनीतिक महत्व को पहचानती है और सभी हितधारकों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। यह बयान जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक बड़ा आश्वासन है, जो अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही राज्य के दर्जे की बहाली की मांग कर रहे हैं।
विकास और सुशासन पर फोकस
उपराज्यपाल ने इस बजट को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह सात साल में निर्वाचित सरकार द्वारा पेश किया जाएगा। उनका मानना है कि यह सत्र महज एक विधायी औपचारिकता नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2018 को आखिरी बजट हुआ था पेश
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के बाद यह पहला बजट सत्र है। इस संदर्भ में, उपराज्यपाल का राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन महत्वपूर्ण है।
