ईरान की राजधानी तेहरान में गुरुवार रात इजरायल ने बड़े हवाई हमले किए, जो पाकिस्तानी दूतावास और राजदूत के आवास के बेहद करीब हुए। धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि आसपास का पूरा इलाका हिल गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि दूतावास परिसर को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुंचा और सभी पाकिस्तानी राजनयिक व स्टाफ सुरक्षित हैं।
पाकिस्तान की सख्त चेतावनी
इस हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान स्ट्रैटेजिक फोरम ने इजरायल को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि “पाकिस्तान कतर नहीं है, जो चुपचाप हमले सह ले।” बयान में कहा गया कि अगर कहीं भी पाकिस्तानी राजनयिकों को नुकसान पहुंचा तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
डिप्लोमैटिक इलाकों के पास बढ़े हमले
ताजा हमलों में तेहरान सहित काशान और आबादान जैसे शहरों को भी निशाना बनाया गया। खास बात यह है कि कई हमले कूटनीतिक इलाकों के आसपास हुए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है।
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
पाकिस्तानी दूतावास के पास हुए हमले ने इस संघर्ष में एक नया भू-राजनीतिक मोड़ जोड़ दिया है। पाकिस्तान फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में यह घटना उसके लिए संवेदनशील बन गई है।
मध्यस्थता की पेशकश भी जारी
इस बीच पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। इस्लामाबाद ने कहा है कि अगर अमेरिका और ईरान सहमत हों तो वह बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच संभावित वार्ता की तैयारी भी चल रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रंप ने बढ़ाई डेडलाइन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बिजली ढांचे पर हमलों की समयसीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
तनाव के बीच बातचीत की उम्मीद
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और स्थिति को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि लगातार हो रहे हमलों के चलते क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है।
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