इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू होने के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि लेबनान इस सीजफायर के दायरे में नहीं आता और वहां उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इस मुद्दे पर ईरान और इजरायल के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
लेबनान को लेकर इजरायल का सख्त बयान
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सआर ने स्पष्ट कहा कि लेबनान में युद्धविराम की शर्तें तय करने का अधिकार ईरान को नहीं दिया जा सकता। उनके अनुसार, ऐसा करने से क्षेत्र में ईरान का प्रभाव और मजबूत होगा, जो इजरायल के लिए स्वीकार्य नहीं है।
हिजबुल्लाह पर कार्रवाई जारी
इजरायल का कहना है कि लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह संगठन उसके हमलों से लगातार कमजोर हो रहा है। विदेश मंत्री के मुताबिक, हिजबुल्लाह की कमजोर स्थिति का सीधा असर ईरान के प्रभाव पर पड़ेगा। इजरायल पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई किसी भी स्थिति में जारी रखेगा।
अमेरिका की भी समान राय
गौरतलब है कि अमेरिका ने भी पहले संकेत दिए थे कि लेबनान को मौजूदा युद्धविराम समझौते में शामिल नहीं किया गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि लेबनान में सक्रिय आतंकी संगठनों के कारण इसे अलग रखा गया है।
ईरान की अलग मांग
वहीं, ईरान ने लेबनान को युद्धविराम का हिस्सा बनाने की मांग दोहराई है। ईरान का कहना है कि किसी भी क्षेत्रीय शांति समझौते में लेबनान को शामिल किए बिना स्थिरता संभव नहीं है।
ईरानी नेतृत्व का कड़ा रुख
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि लेबनान और ‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ ईरान के रणनीतिक सहयोगी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन्हें संघर्षविराम से बाहर रखना न तो संभव है और न ही स्वीकार्य।
मध्य पूर्व में बढ़ सकती है जटिलता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर मतभेद बढ़ने से क्षेत्र में तनाव और गहरा सकता है। लेबनान को लेकर जारी यह विवाद भविष्य में बड़े संघर्ष का कारण भी बन सकता है।
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