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7 साल बाद भारत की ओर बढ़ा ईरानी तेल का टैंकर, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद मिला ग्रीन सिग्नल…

करीब सात साल के अंतराल के बाद भारत की ओर ईरानी कच्चे तेल(Iranian oil tanker) की संभावित वापसी के संकेत मिले हैं। जिस तेल पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा था, वही अब फारस की खाड़ी से होते हुए भारतीय तट की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ‘पिंग शुन’ नाम का एक अफ्रामैक्स टैंकर, जिस पर 2025 में अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए थे, इस सप्ताह के अंत तक गुजरात के वडीनार बंदरगाह पहुंचने का संकेत दे रहा है।

यह जहाज मार्च की शुरुआत में Kharg Island से कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था। हालांकि, इसका अंतिम गंतव्य अभी तय नहीं माना जा रहा है और यह किसी भी समय बदल सकता है। अगर यह खेप सफलतापूर्वक भारत पहुंचती है, तो यह मई 2019 के बाद ईरान से कच्चे तेल का पहला आयात होगा। उस समय United States के प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया था।

मिडिल ईस्ट संकट का असर

हालिया तनाव के कारण Iran और Israel के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है। खासकर Strait of Hormuz से तेल की आवाजाही प्रभावित होने से एशियाई देशों के सामने सप्लाई संकट खड़ा हो गया है। इसी बीच अमेरिका ने पहले से लदे कुछ ईरानी टैंकरों को अस्थायी राहत देने की कोशिश की है, जिससे बाजार में थोड़ी नरमी आई है।

हालांकि, इस संभावित डील के सामने अभी भी कई बड़ी अड़चनें हैं। पेमेंट, बीमा और शिपिंग से जुड़े मसले पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, एशिया में डॉलर ट्रांजैक्शन संभालने वाले कुछ बैंक ईरान से जुड़े सौदों में मध्यस्थता करने से बच रहे हैं, क्योंकि इससे प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है।

पहले भी अटकी डिलीवरी

हाल ही में ‘सी बर्ड’ नाम का एक जहाज मंगलुरु पहुंचा था, लेकिन अब तक उसका कार्गो अनलोड नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि भुगतान से जुड़ी दिक्कतों के चलते खरीदार पक्ष डिलीवरी लेने के लिए तैयार नहीं है।

भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Nayara Energy इस मामले पर अभी खुलकर कुछ नहीं कह रही हैं। वहीं, Nayara Energy इस महीने अपने प्लांट को मेंटेनेंस के लिए बंद करने जा रही है, जिससे फिलहाल उसकी कच्चे तेल की जरूरत भी कम हो जाएगी।इन सभी पहलुओं को देखते हुए साफ है कि ईरानी तेल की भारत में वापसी की राह खुलती जरूर दिख रही है, लेकिन जमीन पर डील पूरी होने से पहले कई जटिल चुनौतियों का हल निकलना अभी बाकी है।

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