मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगें अब ईरान के लिए ही बड़ी चुनौती बन गई हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान को खुद यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि उसने किन-किन स्थानों पर सुरंगें बिछाई थीं, जिससे जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने में देरी हो रही है।
हमलों के बाद शुरू हुई माइन बिछाने की कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने छोटे जहाजों के जरिए होर्मुज में बड़े पैमाने पर बारूदी सुरंगें बिछाईं। इससे पहले 2 मार्च को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जलडमरूमध्य को बंद घोषित करते हुए जहाजों को ‘आग के हवाले’ करने की चेतावनी दी थी। इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी गई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और टैंकरों की आवाजाही में तेज गिरावट दर्ज की गई। ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
अव्यवस्थित तरीके से बिछीं सुरंगें
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सुरंगें बेहद अव्यवस्थित तरीके से बिछाई गईं। कई सुरंगों का रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा गया और समुद्री धाराओं के कारण वे अपनी जगह से बह भी सकती हैं। इससे उन्हें ढूंढना और निष्क्रिय करना बेहद मुश्किल हो गया है।
सीमित रास्ते से ही हो रही आवाजाही
फिलहाल ईरान ने केवल एक संकरा मार्ग खोला है, जहां से सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है। साथ ही, जहाजों को बारूदी सुरंगों के खतरे को लेकर चेतावनी भी दी गई है।
होमुर्ज खुलना जरूरी – ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि किसी भी युद्धविराम के लिए होर्मुज का “पूरी तरह सुरक्षित और तत्काल” खुलना जरूरी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी माना है कि तकनीकी सीमाओं के कारण इसे पूरी तरह खोलना आसान नहीं है। इसी बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता होने जा रही है। माना जा रहा है कि होर्मुज संकट और बारूदी सुरंगों का मुद्दा इस बैठक का मुख्य एजेंडा होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र में सुरंगें बिछाना आसान होता है, लेकिन उन्हें हटाना बेहद जटिल और जोखिम भरा काम है। यही कारण है कि अब ईरान अपने ही बिछाए जाल में उलझता नजर आ रहा है।
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