Wednesday, February 11, 2026
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UN मानवाधिकार परिषद में भारत ने ईरान के समर्थन में डाला वोट, दंग रह गए सभी पश्चिमी देश

ईरान और भारत के बीच पुराने और रणनीतिक संबंध एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर नजर आए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर भारत ने खुलकर विरोध दर्ज किया और पश्चिमी देशों की लाइन से अलग रुख अपनाया।

ईरान के खिलाफ क्या था प्रस्ताव ?

UNHRC की जेनेवा में हुई आपात बैठक में ईरान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर 2022 से चल रही जांच को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव के तहत हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों और कार्रवाई की जांच का आदेश दिया गया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे बड़ा सरकारी दमन था, जिसमें आम नागरिकों की भी जान गई।

भारत ने लिया अलग रुख

अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया समेत पश्चिमी और नाटो समर्थित देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और ईरान पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके उलट भारत ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट देकर साफ कर दिया कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं है। भारत के साथ चीन, पाकिस्तान, क्यूबा और कुछ अन्य देशों ने भी विरोध में मतदान किया।

प्रस्ताव के पक्ष 25 देश

प्रस्ताव के पक्ष में फ्रांस, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, नीदरलैंड्स, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, चेक गणराज्य, लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया

प्रस्ताव के खिलाफ देश

इस प्रस्ताव में भारत, चीन, पाकिस्तान, क्यूबा, इथियोपिया, वेनेजुएला और बोलीविया ने खिलाफ में वोट दिया। इसके अलावा ब्राजील, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य देश 14 देश तटस्थ रहे।

ईरान ने दी प्रतिक्रिया

ईरान ने प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे बाहरी हस्तक्षेप करार दिया। तेहरान का कहना है कि देश में हुई हिंसा के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका है और सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव को स्वीकार नहीं करेगी। ईरान के यूएन मिशन ने प्रस्ताव की कड़ी निंदा की है।

भारत का वोट क्यों माना जा रहा अहम ?

भारत का विरोधी मतदान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत एक बड़ा लोकतंत्र है और पश्चिमी देशों के साथ उसके गहरे रिश्ते हैं। इसके बावजूद भारत ने स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का परिचय देते हुए ईरान के पक्ष में रुख लिया।

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