पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के चलते कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने समुद्री क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास बढ़ाई नौसेना की तैनाती
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी के आसपास लगभग 7 युद्धपोत और लॉजिस्टिक सपोर्ट वेसल्स तैनात किए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों, खासकर तेल और एलपीजी ले जाने वाले टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
ऑपरेशन संकल्प के तहत सक्रिय नौसेना
भारतीय नौसेना पहले से ही 2019 से ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत इस क्षेत्र में सक्रिय है। हालिया हालात को देखते हुए तैनाती और बढ़ा दी गई है। दस दिन पहले भी दो टास्क फोर्स को उत्तर अरब सागर से भारतीय बंदरगाहों तक जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए लगाया गया था।
20 से ज्यादा भारतीय जहाज अभी भी फंसे
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 20 से अधिक भारतीय व्यापारिक जहाज अभी भी होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं। LPG ले जा रहे तीन जहाजों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, लेकिन कई जहाज अब भी प्रभावित क्षेत्र में हैं, जिससे आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।
वैकल्पिक विकल्पों पर विचार
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब रूस, अमेरिका या वेनेजुएला से तेल आयात के विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, इन विकल्पों की लागत ज्यादा होगी। सऊदी अरब के जेद्दा से वैकल्पिक मार्ग भी तलाशे जा रहे हैं।
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