Tuesday, March 3, 2026
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Himachal Pradesh : पंचायत चुनाव टालने पर हाई कोर्ट की फटकार, सक्खू सरकार अदालत में देगी जवाब

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में आज उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई होनी है, जिसमें पंचायत चुनाव में देरी को चुनौती दी गई है। अदालत ने पिछली सुनवाई में ही राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब दोनों पक्षों को अदालत को यह बताना होगा कि पंचायत चुनाव कराने की तैयारी और समयसीमा क्या है, और क्यों अब तक चुनाव की घोषणा नहीं की गई?

“सरकार चुनाव क्यों नहीं कराना चाहती ?” – हाई कोर्ट

बीते गुरुवार को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल पूछे थे। अदालत ने टिप्पणी की थी कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर वह पंचायत चुनाव कराने से क्यों बच रही है? आज सरकार को लिखित रूप से अदालत को बताना होगा कि चुनाव टालने के पीछे कानूनी आधार क्या है?

हिमाचल सरकार ने दी यह वजह

राज्य सरकार ने चुनाव न कराने के लिए आपदा (Disaster Act) का हवाला दिया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने 8 अक्टूबर को कहा था कि इस वर्ष प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा के कारण हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं, इसलिए, पंचायत चुनाव बाद में कराए जाएंगे। इसके बाद राज्य कैबिनेट ने पंचायतों के पुनर्गठन का निर्णय लिया, जिसके पूरा होने में लगभग दो से ढाई महीने का समय लग सकता है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार फिलहाल चुनाव टालने के मूड में है।

याचिका में संविधान और कानून का हवाला

याचिका में संविधान और हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं 120 और 160 का उल्लेख किया गया है, जिनमें स्पष्ट कहा गया है कि हर पंचायत का कार्यकाल 5 साल से अधिक नहीं हो सकता। मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए चुनाव कराना अनिवार्य है। स्टेट इलेक्शन कमीशन की जिम्मेदारी है कि वह समय पर चुनाव सुनिश्चित करे।

कितने पंचायतों में होगा चुनाव ?

हिमाचल प्रदेश में इस बार चुनाव 3577 पंचायतों और 71 नगर निकायों में होने हैं। पंचायती चुनाव में पांच पदों के लिए वोट डाले जाएंगे प्रधान, उपप्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और शहरी निकायों में वार्ड पार्षदों के चुनाव होंगे। मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है।