Wednesday, February 11, 2026
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इधर हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर खोलने का दिया आदेश, उधर किसान संगठनों ने फिर बनाया दिल्ली कूच का प्लान…

किसान आंदोलन से जुड़ी बड़ी खबर है। सोमवार को पंजाब के संगरूर में खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह दलेवाल के नेतृत्व में गैर राजनीतिक किसान मोर्चा की बैठक होने जा रही है। इस बैठक के बाद अन्य किसान संगठनों के साथ भी बैठक होगी। माना जा रहा है कि दिल्ली कूच को लेकर किसानों की इन बैठकों में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

दरअसल, हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में शंभू बॉर्डर खोलने के निर्देश दिए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हरियाणा सरकार से अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर लगी बैरिकेडिंग हटाने को कहा है। किसान 13 फरवरी से यहां डेरा डाले हुए हैं। सरकार ने उनके ‘दिल्ली चलो’ मार्च को रोक दिया था। हाईवे जाम करने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाए हैं। खनौरी बॉर्डर पर होने जा रही है बैठक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत अपनी मांगों को लेकर किसान फरवरी से पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर धरने पर बैठे हैं।

अब कोर्ट द्वारा एक सप्ताह में शंभू बॉर्डर खोलने के आदेश के बाद किसानों में हड़कंप मच गया है। क्या अब किसान दिल्ली कूच करेंगे? इस पर चर्चा तेज हो गई है। संगरूर के खनौरी बॉर्डर पर किसानों की इस अहम बैठक में दिल्ली कूच को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

हाईकोर्ट ने 7 दिन के अंदर शंभू बॉर्डर खोलने के आदेश दिए थे

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को हरियाणा सरकार को एक सप्ताह के अंदर शंभू बॉर्डर पर लगे बैरिकेड्स खोलने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने पंजाब को यह भी निर्देश दिया था कि जरूरत पड़ने पर उनके इलाके में जमा प्रदर्शनकारियों को उचित तरीके से नियंत्रित किया जाए।

हाईकोर्ट ने यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा, दोनों राज्य यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि शंभू बॉर्डर पर हाईवे पर यातायात बहाल हो और सभी के लिए खुला रहे। जनता की सुविधा के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए। कोर्ट ने कहा, हरियाणा द्वारा की गई नाकेबंदी से काफी असुविधा हो रही है।

पहले स्थिति तनावपूर्ण थी…

कोर्ट ने कहा कि राज्यों ने स्वीकार किया है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या अब घटकर 400-500 ही रह गई है। पहले के आदेशों में हमने राजमार्गों को खोलने का निर्देश नहीं दिया था, क्योंकि उस समय शंभू सीमा पर 13000-15000 की भीड़ के कारण स्थिति तनावपूर्ण थी। यह आम जनता के हित में होगा कि हरियाणा आने वाले समय में राजमार्गों को अवरुद्ध करना जारी न रखे। हम हरियाणा को निर्देश देते हैं कि कम से कम शंभू सीमा पर लगाए गए बैरिकेड्स एक सप्ताह के भीतर खोल दिए जाएं, ताकि आम जनता को असुविधा न हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शनकारी राज्य द्वारा निर्धारित अपनी सीमाओं के भीतर नहीं रहते हैं, तो हरियाणा राज्य उनके खिलाफ कानून व्यवस्था लागू करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है।

किसान कानून व्यवस्था बनाए रखें…

हाईकोर्ट ने आंदोलन में भाग लेने वाले किसान संगठनों को कानून व्यवस्था बनाए रखने का भी निर्देश दिया। वहीं, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दोनों मंचों एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और केएमएम की बैठक बुलाई है। हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हमने सड़क को अवरुद्ध नहीं किया है। केंद्र और हरियाणा सरकार द्वारा बैरिकेड्स लगाए गए हैं। किसानों का कभी भी सड़क जाम करने का कोई इरादा नहीं था। अगर सरकार हाईवे खोलती है तो किसान यातायात में कोई बाधा नहीं डालेंगे।

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने…

12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा था कि कोई राज्य हाईवे कैसे रोक सकता है? ट्रैफिक को नियंत्रित करना उसका कर्तव्य है। हम कह रहे हैं कि इसे खोलो लेकिन नियंत्रित करो। जस्टिस सूर्यकांत ने हरियाणा सरकार के वकील से कहा, “आप हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती क्यों देना चाहते हैं? किसान भी इसी देश के नागरिक हैं। उन्हें खाना और अच्छी चिकित्सा सुविधा दीजिए। वे आएंगे, नारे लगाएंगे और वापस चले जाएंगे। मुझे लगता है कि आप सड़क मार्ग से यात्रा नहीं करते हैं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि वे सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं। पीठ ने कहा कि तब आपको भी परेशानी हो रही होगी।

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