रामपुर(Rampur) की स्वार तहसील स्थित एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब स्वार-टांडा के विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे पुलिस बल के साथ ‘निरीक्षण’ के लिए पहुंच गए। हैरानी की बात यह रही कि उनके पास कोई आधिकारिक अधिकार न होने के बावजूद उन्होंने अस्पताल में मौजूद चिकित्सा अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर स्टाफ को निर्देश देने शुरू कर दिए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि विधायक का बेटा पूरे रौब के साथ अस्पताल में मौजूद है। उसने न केवल वरिष्ठ डॉक्टर की कुर्सी संभाली, बल्कि वहां मौजूद कर्मचारियों से ऐसे बात की जैसे वह खुद कोई उच्च अधिकारी हो। बताया जा रहा है कि यह वीडियो खुद उनके कहने पर रिकॉर्ड कराया गया और बाद में वायरल हुआ, जिससे मामला और तूल पकड़ गया।
CMO ने लिया सख्त संज्ञान
मामला सामने आने के बाद रामपुर की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) दीपा सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि विधायक के दौरे की सूचना थी, लेकिन उनके स्थान पर उनके बेटे का आना और इस तरह का व्यवहार किसी भी सरकारी प्रोटोकॉल में शामिल नहीं है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चिकित्सा अधिकारी ने अपनी कुर्सी उन्हें ऑफर नहीं की थी। पूरे मामले की जांच के लिए एडिशनल सीएमओ की अगुवाई में एक कमेटी गठित कर दी गई है।
पुलिस सुरक्षा पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि आखिर विधायक पुत्र को इतनी भारी पुलिस सुरक्षा किस आधार पर दी गई। सीएमओ ने इस पहलू को भी जांच के दायरे में शामिल करने की बात कही है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।