FY 2026-27: 1 अप्रैल 2026 से नया वित्त वर्ष (FY 2026-27) शुरू होते ही देश में कई अहम आर्थिक बदलाव लागू हो गए हैं। फरवरी में पेश बजट के तहत टैक्स, कीमतों और रोजमर्रा की चीजों में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। इस बार सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाने के साथ-साथ कई क्षेत्रों में राहत और कुछ में बोझ बढ़ाया है।
GST और टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव
इस साल सबसे बड़ा बदलाव GST ढांचे में किया गया है। पहले मौजूद चार स्लैब की जगह अब केवल 5% और 18% के दो टैक्स स्लैब लागू कर दिए गए हैं, जिससे टैक्स प्रणाली को आसान बनाने की कोशिश की गई है। वहीं निवेशकों के लिए झटका है, क्योंकि स्टॉक मार्केट के फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा अब इनकम टैक्स में जानकारी छिपाने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें पकड़े जाने पर टैक्स के बराबर यानी 100% जुर्माना देना होगा।
दवाइयों और टेक्नोलॉजी में राहत
नए नियमों के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत दी गई है। कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की 17 जरूरी दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटा दी गई है, जिससे मरीजों को सस्ती दवाइयां मिलेंगी। वहीं भारत में बने स्मार्टफोन और टैबलेट अब सस्ते हो गए हैं। इसके साथ ही माइक्रोवेव और एयरक्राफ्ट के कुछ पार्ट्स पर भी टैक्स में कमी की गई है।
इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर टैक्स कम किया गया है। इसके अलावा बायोगैस, CNG और सोलर पैनल में इस्तेमाल होने वाला ग्लास भी सस्ता हुआ है। यह कदम ग्रीन एनर्जी और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लाइफस्टाइल और विदेश यात्रा हुई सस्ती
लेदर के जूते, कपड़े और साड़ियां अब कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। साथ ही विदेश यात्रा या पढ़ाई के लिए जाने वालों को राहत मिली है, क्योंकि TCS (Tax Collected at Source) में कटौती की गई है। इससे विदेशी टूर पैकेज और एजुकेशन खर्च थोड़ा कम होगा।
लग्जरी और कुछ सेक्टर पर बढ़ा खर्च
दूसरी ओर, कुछ चीजों पर खर्च बढ़ गया है। लग्जरी घड़ियां और विदेशी शराब अब महंगी हो गई हैं। कॉफी मशीनों पर मिलने वाली टैक्स छूट खत्म कर दी गई है, जिससे उनकी कीमत बढ़ेगी। सिगरेट पर टैक्स बढ़ने से यह भी महंगी हो गई है, जिससे धूम्रपान करने वालों की जेब पर असर पड़ेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर असर
आयरन ओर, कोयला और अन्य खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी से निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े उपकरण भी अब महंगे हो गए हैं।
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