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बिना सिलेंडर घर तक कैसे पहुंचती है PNG गैस? जानिए पाइपलाइन से किचन तक का पूरा सफर

PNG Gas: आज के दौर में रसोई गैस का तरीका तेजी से बदल रहा है। जहां पहले हर घर में सिलेंडर आधारित एलपीजी का इस्तेमाल होता था, वहीं अब पाइपलाइन से मिलने वाली पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। यह गैस बिना सिलेंडर सीधे पाइप के जरिए घरों तक पहुंचती है, लेकिन इसके पीछे एक लंबी और तकनीकी प्रक्रिया काम करती है।

PNG और LPG में क्या है फर्क?

PNG असल में नेचुरल गैस ही होती है, जो हवा से हल्की होती है। इसका मतलब है कि लीक होने पर यह ऊपर की ओर फैल जाती है, जिससे खतरा कम होता है। वहीं एलपीजी हवा से भारी होती है और नीचे जमा हो जाती है, जिससे विस्फोट का जोखिम बढ़ जाता है। इसी कारण सुरक्षा के लिहाज से पीएनजी को अधिक सुरक्षित माना जाता है।

कैसे बनती है नेचुरल गैस

नेचुरल गैस एक फॉसिल फ्यूल है, जो लाखों साल पहले दबे जीव-जंतुओं और पौधों के अवशेषों से बनती है। अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण यह रासायनिक परिवर्तन से गुजरती है और अंततः गैस, कोयला और कच्चे तेल में बदल जाती है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन होती है, जो जल्दी जलने वाली और साफ ईंधन मानी जाती है।

कैसे बनाया जाता है गैस को इस्तेमाल लायक

जमीन या समुद्र के नीचे से निकाली गई रॉ नेचुरल गैस सीधे उपयोग के योग्य नहीं होती। इसमें पानी की नमी, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी अशुद्धियां होती हैं। इसलिए इसे प्रोसेसिंग प्लांट में भेजकर साफ किया जाता है। यहां गैस से नमी हटाई जाती है और जहरीले तत्वों को अलग किया जाता है, ताकि केवल शुद्ध गैस बच सके।

सीएनजी और पीएनजी में कैसे बनता है अंतर

प्रोसेसिंग के बाद यही गैस अलग-अलग रूप में इस्तेमाल होती है। अगर इसे उच्च दबाव में संपीड़ित किया जाए तो यह सीएनजी बनती है, जबकि पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचने पर यही पीएनजी कहलाती है।

सिटी गैस नेटवर्क कैसे करता है काम

पीएनजी की सप्लाई एक बड़े नेटवर्क के जरिए होती है, जिसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कहा जाता है। भारत में गेल (GAIL), इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और महानगर गैस लिमिटेड जैसी कंपनियां इस सिस्टम को संचालित करती हैं। सबसे पहले गैस को लंबी ट्रांसमिशन पाइपलाइनों के जरिए शहरों तक पहुंचाया जाता है। ये पाइपलाइन जमीन के नीचे बिछी होती हैं और इनमें गैस हाई प्रेशर में रहती है। शहर में पहुंचने के बाद गैस को सीधे घरों में नहीं भेजा जाता, बल्कि पहले सिटी गेट स्टेशन (CGS) पर उसका दबाव कम किया जाता है।

आपके घर तक कैसे पहुंचती है गैस

CGS से गैस छोटे पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए कॉलोनियों और गलियों में भेजी जाती है। इसके बाद हर घर तक एक पतली पाइपलाइन कनेक्शन दिया जाता है। घर के बाहर एक मीटर लगाया जाता है, जो गैस की खपत को मापता है। इसके बाद गैस सीधे किचन के चूल्हे तक पहुंचती है।

पीएनजी के क्या हैं फायदे?

पीएनजी का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुविधा है, क्योंकि इसमें सिलेंडर खत्म होने या बुकिंग की चिंता नहीं होती। यह लगातार सप्लाई देता है और पर्यावरण के लिए भी अपेक्षाकृत साफ ईंधन है। लंबे समय में यह किफायती भी साबित होता है। हालांकि, इसकी उपलब्धता अभी हर जगह नहीं है और शुरुआती इंस्टॉलेशन में खर्च आता है। इसके बावजूद इसमें कई सुरक्षा सिस्टम होते हैं, जैसे प्रेशर कंट्रोल, ऑटोमेटिक कट-ऑफ और लीकेज डिटेक्शन, जो इसे और सुरक्षित बनाते हैं।

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Yogita Tyagi
Yogita Tyagihttps://mhone.in/
योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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