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‘कोई भी देश इस मुसीबत से नहीं बचेगा’, जंग के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट पर IEA प्रमुख ने दुनिया को दी बड़ी चेतावनी

Global Energy Crisis: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने अब वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप ले लिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं और यदि स्थिति नहीं सुधरी तो कोई भी देश इसके असर से बच नहीं पाएगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आवाजाही लगभग ठप

करीब तीन सप्ताह से जारी इस संघर्ष के बीच दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इससे वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति बाधित हो रही है और भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई है।

IEA की सख्त चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह संकट पहले आए दो बड़े तेल संकटों का मिला-जुला रूप बन चुका है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति इसी तरह बिगड़ती रही तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है और तत्काल अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।

40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए IEA के सदस्य देशों ने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। यह एजेंसी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है। इससे पहले भी एजेंसी सरकारों, कंपनियों और आम लोगों को संकट के असर को कम करने के उपाय सुझा चुकी है।

तेल सप्लाई पर बड़ा असर

होर्मुज जलसंधि के बंद होने से रोजाना करीब दो करोड़ बैरल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जहां कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। डीजल, जेट ईंधन और एलपीजी जैसी रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा तनाव

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में होर्मुज जलसंधि नहीं खोली गई तो अमेरिका ईरान के प्रमुख बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह न केवल जलसंधि को स्थायी रूप से बंद कर देगा, बल्कि उन देशों के ऊर्जा केंद्रों को भी निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। तेजी से बदलते हालात के बीच यह संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

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