कभी-कभी एक फोन कॉल जिंदगी बदल देता है। ठाणे के कल्याण में रहने वाली 82 साल की एक बुजुर्ग महिला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। 6 अप्रैल को आए एक कॉल ने उनकी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी छीन ली। कॉल करने वाले ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताया और बातों-बातों में ऐसा डर पैदा किया कि महिला पूरी तरह उसके जाल में फंस गईं।
आपका नंबर आतंकी नेटवर्क से जुड़ा – ठग
ठगों ने महिला से कहा कि उनका मोबाइल नंबर एक पाकिस्तानी सैनिक से जुड़ा हुआ है, जो पहलगाम आतंकी हमले में शामिल है। यह सुनते ही महिला घबरा गईं। ठगों ने तुरंत अगला दांव खेलते हुए कहा कि उन पर केस दर्ज हो सकता है और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया जा सकता है। इस धमकी ने महिला को पूरी तरह डरा दिया।
जांच के नाम पर शुरू हुआ पैसों का खेल
डर के माहौल में ठगों ने महिला को भरोसा दिलाया कि अगर वह सहयोग करेंगी तो उन्हें बचाया जा सकता है। इसके लिए बैंक खातों की “जांच” और “वेरिफिकेशन ट्रांजेक्शन” का बहाना बनाया गया। महिला को यकीन दिलाया गया कि यह प्रक्रिया का हिस्सा है और पैसे वापस मिल जाएंगे।
चार दिन में 73 लाख रुपये ट्रांसफर
6 अप्रैल से 10 अप्रैल तक ठग लगातार अलग-अलग नंबरों से संपर्क करते रहे। फोन और व्हाट्सएप के जरिए निर्देश दिए जाते रहे—कभी “आखिरी वेरिफिकेशन” का बहाना, तो कभी गिरफ्तारी का डर। डरी हुई महिला लगातार पैसे ट्रांसफर करती गईं। चार दिनों में उन्होंने कुल 73.3 लाख रुपये अलग-अलग खातों में भेज दिए।
कॉल बंद होने से खुली पोल
10 अप्रैल के बाद अचानक कॉल आना बंद हो गया। व्हाट्सएप पर भी कोई जवाब नहीं मिला। जब महिला ने संपर्क करने की कोशिश की, तो हर तरफ सन्नाटा था। तभी उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।
पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई शिकायत
महिला ने महात्मा फुले चौक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पांच मोबाइल नंबरों की पहचान की है, जिनके जरिए ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि कोई भी जांच एजेंसी फोन या व्हाट्सएप पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। अगर कोई ऐसा दावा करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और पुलिस से संपर्क करें। आज ठग डर को हथियार बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
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