Tuesday, February 10, 2026
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Himachal में ई-बस ट्रायल बना मजाक…बस सोलन आई लेकिन चाबी रह गई हैदराबाद

हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की प्रस्तावित ई-बस सेवा के ट्रायल के दौरान एक दिलचस्प खबर सामने आई। ट्रायल के लिए बस को ट्राले पर लादकर कंपनी ने सोलन तो पहुंचा दिया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि बस की चाबी भेजना ही भूल गई। इस चूक के चलते निगम के अधिकारियों को बस को ट्राले से उतारने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

देर रात फ्लाइट से पहुंचाई गई चाबी

काफी देर तक जब बस की चाबी नहीं मिल सकी, तो एचआरटीसी ने तुरंत बस निर्माता कंपनी से संपर्क साधा। इसके बाद चाबी को हैदराबाद से हवाई मार्ग के जरिए चंडीगढ़ भेजा गया और वहां से देर शाम सोलन पहुंचाया गया। चाबी मिलने के बाद ही ई-बस को सुरक्षित तरीके से ट्राले से उतारा जा सका।

इस दौरान निगम अधिकारियों ने बताया कि चाबी न होने की स्थिति में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ट्राले को एक सुरक्षित स्थान पर खड़ा किया गया था, ताकि किसी प्रकार की क्षति या असुविधा न हो। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद अधिकारियों के रुख में भी कुछ बदलाव नजर आया।

सोलन से अर्की तक हुआ ई-बस का ट्रायल

चाबी मिलने के बाद ई-बस के परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पहले दिन बस का ट्रायल सोलन से अर्की तक ममलीग मार्ग से किया गया। इस दौरान एचआरटीसी और संबंधित कंपनी के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और बस के तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई। बस को पूरी तरह चार्ज करने के बाद यह देखा गया कि फुल चार्ज में बस कितनी दूरी तय कर सकती है। इसके साथ ही चार्जिंग सिस्टम, ब्रेक, पिकअप और अन्य तकनीकी सुविधाओं का भी परीक्षण किया गया।

एचआरटीसी ने आने वाले दिनों में विभिन्न अन्य रूटों पर भी ई-बस के ट्रायल करने की योजना बनाई है। अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और मार्गों पर परीक्षण के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में ई-बसों की खरीद को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब छह बजे ई-बस हैदराबाद से सोलन पहुंची थी। सबसे पहले इसे एचआरटीसी वर्कशॉप में खड़ा किया गया, लेकिन वहां बस उतारने के लिए उपयुक्त व्यवस्था न होने के कारण अगले दिन इसे सेब मंडी के पास खड़ा किया गया। जब टीम ने मिट्टी के ढेर पर बस उतारने की तैयारी की और चाबी मांगी, तब पता चला कि चाबी उपलब्ध नहीं है। इसी कारण बस को तुरंत ट्राले से नीचे नहीं उतारा जा सका।

यह भी पढ़ें : Uttarakhand में बुलडोजर एक्शन तेज, देहरादून में अवैध मजार हुई…

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