दिल्ली सरकार ने इस बार नगर निगम (MCD) को ₹11,600 करोड़ का ऐतिहासिक बजट आवंटित करने का प्रावधान किया है। यह पहली बार है जब MCD को इतनी बड़ी वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य राजधानी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
ग्रीन बजट पर विशेष जोर
इस साल दिल्ली सरकार ने अपने बजट को ग्रीन बजट के रूप में पेश किया है। कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरण सुधार और हरित परियोजनाओं के लिए निर्धारित किया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रदूषण कम करना और शहर को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास पर फोकस
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया गया है। सरकार की योजना है कि नई दिल्ली की तर्ज पर राजधानी के अन्य इलाकों को भी विकसित किया जाए। इसके साथ ही कूड़ा प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए भी कई अहम कदम उठाए जाएंगे।
पार्षदों के फंड में बढ़ोतरी
स्थानीय विकास कार्यों को गति देने के लिए पार्षदों के फंड में बढ़ोतरी की गई है। अब पार्षदों को हर साल ₹1.55 करोड़ की जगह ₹2 करोड़ मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर विकास कार्यों को और तेजी मिलेगी।
राजस्व बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनने की योजना
एमसीडी को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए संपत्ति कर के दायरे को बढ़ाने, विज्ञापन, पार्किंग और अन्य स्रोतों से राजस्व जुटाने की योजना बनाई गई है। इससे निगम को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी दिल्ली में इस साल करीब ₹9,000 करोड़ का रिवेन्यू सरप्लस रहने का अनुमान है। वहीं, सरकार ने बजट में 10 फोकस एरिया तय किए हैं और लगभग ₹16,700 करोड़ का ऋण लेने का भी प्रावधान किया है।
राजधानी को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम
सरकार का कहना है कि इस बजट के जरिए दिल्ली के हर हिस्से को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और शहरी सेवाओं में सुधार के साथ राजधानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी की गई है।
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