मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब भारत के औद्योगिक इलाकों में भी दिखने लगा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में कमर्शियल गैस(Commercial Gas Shortage) सिलेंडरों की गंभीर कमी सामने आई है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। नियमित सप्लाई बाधित होने के कारण कई यूनिट्स का उत्पादन धीमा पड़ गया है, जबकि कुछ कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
उद्योग संचालकों का कहना है कि वे समय से गैस सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं, लेकिन डिलीवरी तय समय पर नहीं हो पा रही। कई मामलों में बुकिंग के बाद भी कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे उत्पादन चक्र पूरी तरह बिगड़ गया है। खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और छोटे कारखाने इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
लागत बढ़ी, मुनाफा घटा
व्यापारियों के मुताबिक गैस की कमी का सीधा असर लागत पर पड़ा है। वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने से खर्च बढ़ गया है, जिससे मुनाफा कम हो रहा है। कई उद्यमियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो उन्हें अस्थायी रूप से अपने कारोबार बंद करने पड़ सकते हैं।
बंद होने के कगार पर फैक्ट्रियां
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कई व्यापारियों ने बताया कि पिछले कई दिनों से उन्हें कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ फैक्ट्रियों को कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना पड़ा है। उत्पादन ठप होने से उद्योगों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। जहां एक ओर प्रशासन पर्याप्त गैस उपलब्ध होने का दावा कर रहा है, वहीं उद्योग जगत के लोग इसे जमीनी स्तर पर गलत बता रहे हैं।
उनका कहना है कि करीब 20 दिनों से नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। कुल मिलाकर, गैस की इस कमी ने औद्योगिक गतिविधियों पर गंभीर असर डाला है और यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।