पंजाब के प्रसिद्ध किला रायपुर ग्रामीण खेल (रूरल ओलंपिक) में इस बार खास उत्साह देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान स्वयं कार्यक्रम में पहुंचे और खिलाड़ियों को संबोधित किया। किला रायपुर में आयोजित इन ग्रामीण खेलों को “ग्रामीण ओलंपिक” के नाम से जाना जाता है। देश-विदेश से हजारों दर्शक यहां पारंपरिक खेलों जैसे बैलगाड़ी दौड़, कबड्डी, कुश्ती, टग-ऑफ-वार और पशु-कौशल प्रतियोगिताओं का रोमांच देखने पहुंचते हैं।
बैलगाड़ी दौड़ पंजाब की सांस्कृतिक पहचान – CM मान
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ पंजाब की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है और इसे दोबारा शुरू कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता थी। उन्होंने बताया कि कानूनी व प्रशासनिक बाधाओं के कारण यह प्रतियोगिता पिछले 12 वर्षों से बंद थी, लेकिन अब सभी आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों के साथ इसे फिर शुरू किया गया है। उन्होंने कहा, “ग्रामीण खेल हमारी विरासत हैं। बैलगाड़ी दौड़ केवल एक खेल नहीं, बल्कि किसान और पशुधन से जुड़े पंजाब के इतिहास और परंपरा का प्रतीक है। इसका पुनः आयोजन गांवों की खेल संस्कृति को नई पहचान देगा।”
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक पोशाकों में सजे ग्रामीण खिलाड़ियों और सजी-धजी बैलगाड़ियों ने मैदान में रंगारंग दृश्य प्रस्तुत किया। तेज रफ्तार बैलों के साथ दौड़ती गाड़ियों ने दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया।
कई राज्य के प्रतिभागी पहुंचे
आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष ग्रामीण ओलंपिक में पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी प्रतिभागी पहुंचे हैं। खेलों में कबड्डी, कुश्ती, एथलेटिक्स, रस्साकशी, पशु दौड़ और ट्रैक्टर स्टंट जैसे अनेक आयोजन शामिल हैं। ग्रामीण खेलों के संरक्षकों का कहना है कि बैलगाड़ी दौड़ की वापसी से किला रायपुर खेलों की पुरानी पहचान फिर मजबूत होगी। स्थानीय किसानों और पशुपालकों ने भी मुख्यमंत्री का आभार जताया और कहा कि यह फैसला ग्रामीण परंपराओं के सम्मान का प्रतीक है।
किला रायपुर ग्रामीण खेलों का आयोजन हर वर्ष लुधियाना जिले के किला रायपुर गांव में किया जाता है, जिसे ग्रामीण खेल संस्कृति का विश्व-स्तरीय मंच माना जाता है। बैलगाड़ी दौड़ की पुनर्बहाली के साथ इस वर्ष का आयोजन ऐतिहासिक बन गया है और आने वाले वर्षों में इसके और भव्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।