Tuesday, February 10, 2026
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चंडीगढ़ अदालत ने दो बहनों के हत्यारे को सुनाई उम्र कैद की सजा, पीजी में घुसकर वारदात को दिया था अंजाम

पंजाब के फाजिल्का जिले की रहने वाली दो सगी बहनों मनप्रीत कौर और राजवंत कौर की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला अदालत ने इस हत्याकांड के दोषी कुलदीप सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। चंडीगढ़ पुलिस से सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर का बेटा, जीरकपुर निवासी 39 वर्षीय कुलदीप सिंह ने 15 अगस्त 2019 को एकतरफा प्रेम में आकर इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था।

क्या था मामला ? 

दोनों बहनें चंडीगढ़ के सेक्टर-22 स्थित एक पीजी में रहती थीं। कुलदीप ने उसी पीजी में घुसकर वारदात को अंजाम दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मनप्रीत कौर पर कैंची से कई वार किए गए थे। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई कैंची भी बरामद कर ली थी।  केस का चुनौतीपूर्ण मोड़ तब आया जब इकलौती गवाह शशि,अदालत में अपने बयान से पलट गई थी। उसने पहले दावा किया था कि उसने उसी युवक को कमरे में देखा था, जो मनप्रीत से झगड़ रहा था और वह युवक कुलदीप ही था, लेकिन कोर्ट में उसने कुलदीप की पहचान करने से इनकार कर दिया। 

ऐसे में पुलिस को साक्ष्यों की मजबूत कड़ी तैयार करनी पड़ी। जांच में यह साबित हुआ कि कुलदीप मनप्रीत से प्रेम करता था और उससे विवाह करना चाहता था। जब मनप्रीत ने उससे दूरी बनानी शुरू की, तो कुलदीप को शक हुआ कि वह किसी और से बात कर रही है। इसी शक और गुस्से में उसने पहले मनप्रीत की हत्या कर दी और पकड़े जाने के डर से उसकी बहन राजवंत कौर की भी जान ले ली।

पिता के बयान से रिश्ते की हुई पहचान 

आरोपी कुलदीप बार-बार यह दावा करता रहा कि उसका मनप्रीत से कोई संबंध नहीं था, लेकिन अदालत में बहनों के पिता ने स्पष्ट रूप से बताया कि मनप्रीत और कुलदीप के बीच दोस्ती थी, जिससे आरोपी के दावे कमजोर पड़ गए। पूछताछ में कुलदीप ने भी स्वीकार किया था कि वह मनप्रीत से प्यार करता था और उससे विवाह करना चाहता था। 

ताले की चाबी बनी अहम सबूत

हत्या को अंजाम देने के बाद कुलदीप लड़कियों के कमरे पर ताला लगाकर फरार हो गया था। बाद में जब उसे गिरफ्तार किया गया, तो उसकी जेब से उसी ताले की चाबी बरामद हुई, जिसने पुलिस के दावे को मजबूती दी। पुलिस ने आरोपी के पास से एक बैग बरामद किया, जिसमें कैंची, कड़ा, घड़ी और कपड़े मिले। 

इन सभी वस्तुओं पर लगे खून के धब्बों की डीएनए जांच कराई गई, जो मनप्रीत के रक्त नमूनों से मेल खा गए। इसके अलावा पुलिस के पास मनप्रीत और कुलदीप के बीच हुई फोन बातचीत का कॉल रिकॉर्ड भी था, जिसने दोनों के बीच संपर्क होने की पुष्टि कर दी।

अदालत ने क्या कहा ? 

अदालत ने कहा कि पुलिस के पास मौजूद साक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं और यह साबित नहीं होता कि आरोपी को किसी झूठे मामले में फंसाया गया हो। न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस आरोपी को झूठे केस में क्यों फंसाएगी, जबकि उसके खिलाफ ठोस सबूत मौजूद हैं।

आरोपी को पहचानने से मुकरी गवाह

मनप्रीत और राजवंत सेक्टर-22 की एक इमारत के शीर्ष तल पर रहती थीं। उसी इमारत की पहली मंजिल पर रहने वाली शशि टिफिन सर्विस चलाती थी। उसने पुलिस को बताया था कि शोर सुनकर वह ऊपर गई और वहां कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला देखा। अंदर उसने एक युवक को मनप्रीत से बहस करते हुए देखा था। 

युवक ने उसे सब ठीक होने की बात कहकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। बाद में शशि ने पुलिस को बताया था कि वही युवक कुलदीप था, लेकिन अदालत में उसने अपनी पहचान से इनकार कर दिया। इसके बावजूद परिस्थितिजन्य सबूतों की मजबूत कड़ी के आधार पर अदालत ने कुलदीप सिंह को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

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