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‘भारत जैसा सस्ता रूसी डीजल हमें भी दो…’, ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश की ट्रंप से गुहार

बढ़ते वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल-गैस की कीमतों में उछाल के बीच बांग्लादेश(Bangladesh) ने अमेरिका से खास राहत की मांग की है। ढाका ने वॉशिंगटन से अपील की है कि उसे रूस से डीजल खरीदने के लिए अस्थायी प्रतिबंध छूट दी जाए ठीक उसी तरह, जैसी सुविधा भारत को दी गई थी। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बांग्लादेश ने अपने प्रस्ताव में भारत का उदाहरण देते हुए कहा है कि अगर नई दिल्ली को रूसी तेल खरीदने के लिए सीमित अवधि की छूट मिल सकती है, तो उसे भी ऐसी ही राहत दी जानी चाहिए। बांग्लादेश ने दो महीने की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिकतम 6 लाख मीट्रिक टन रूसी डीजल आयात करने की अनुमति मांगी है। ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव मोनिर हुसैन चौधरी ने बताया कि इस संबंध में अमेरिका को औपचारिक पत्र भेज दिया गया है और अब जवाब का इंतजार है।

आयात पर पूरी तरह निर्भर बांग्लादेश

करीब 17.5 करोड़ की आबादी वाला बांग्लादेश अपनी लगभग 95% ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक बाजार में अस्थिरता का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। हालात को संभालने के लिए सरकार को ईंधन की राशनिंग तक लागू करनी पड़ी, हालांकि ईद-उल-फितर के मौके पर कुछ राहत दी गई।

अधिकारियों के मुताबिक, बांग्लादेश अब अमेरिका, रूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, अंगोला और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से ईंधन खरीद के विकल्प तलाश रहा है। इसके साथ ही मौजूदा साझेदारों से आयात भी बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन अप्रैल में भारत की नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से 40,000 मीट्रिक टन डीजल खरीदने जा रहा है, जो मार्च के मुकाबले लगभग दोगुना है।

ईरान युद्ध का असर

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है। तेल आपूर्ति में बाधा और कीमतों में तेजी से आयात पर निर्भर देशों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से हमलों के बाद ईरान ने अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण कर दिया है।

यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल सीमित देशों के जहाजों को ही यहां से गुजरने की अनुमति दी जा रही है, जिसमें भारत भी शामिल है। ऐसे हालात में बांग्लादेश की यह मांग उसके बढ़ते ऊर्जा संकट और वैश्विक हालात से निपटने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

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