Tuesday, March 3, 2026
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Assam : PM मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले – इनके एजेंडे में नहीं था नॉर्थ ईस्ट का विकास

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पश्चिम बंगाल दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम पहुंचे। उन्होंने गुवाहाटी स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन किया। यह देश का पहला हवाई अड्डा टर्मिनल है जो “प्रकृति और बांस उद्यान” की थीम पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने बताया कि यह नया टर्मिनल असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत के विकास का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा को किया संबोधित

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “आज का यह दिवस एक प्रकार से विकास के उत्सव का दिवस है। यह केवल असम का नहीं, पूरे नॉर्थ ईस्ट के विकास का उत्सव है। मैं आप सबसे कहता हूं। अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाइए, ताकि पूरा देश देखे कि असम विकास का उत्सव मना रहा है।” उन्होंने कहा कि जब विकास का प्रकाश पहुंचता है, तो जीवन नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता है। उन्होंने इस मौके पर उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे इस उत्सव के सहभागी बनें।

कांग्रेस के एजेंडे में नॉर्थ ईस्ट का विकास शामिल नहीं – प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास की दिशा में कोई ठोस नीति नहीं अपनाई गई। “कांग्रेस के एजेंडे में नॉर्थ ईस्ट का विकास कभी शामिल ही नहीं था। उन्होंने इस क्षेत्र को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन इसके बुनियादी ढांचे और युवाओं के भविष्य पर ध्यान नहीं दिया।”

असम के विकास में जुड़ा नया अध्याय

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि असम की धरती से उनका आत्मिक जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि “असम की जनता का स्नेह, पूर्वोत्तर की माताओं-बहनों का प्रेम हमें निरंतर प्रेरित करता है। आज असम के विकास यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।” उन्होंने कहा कि जैसे ब्रह्मपुत्र की धारा कभी नहीं रुकती, वैसे ही भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास की धारा भी अनवरत बह रही है।

बांस की थीम पर बना पर्यावरण अनुकूल टर्मिनल

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह नया टर्मिनल भवन आधुनिकता और प्रकृति के संतुलन का उदाहरण है। “टर्मिनल की डिजाइन में हरियाली है, तकनीक है और प्रकृति से जुड़ाव है। इस भवन में बांस का उपयोग किया गया है, जो सुंदरता के साथ-साथ मजबूती का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि पहले देश में बांस को पेड़ की श्रेणी में रखा गया था, जिससे उसका उपयोग सीमित था। “2014 के बाद हमने कानून में बदलाव किया और बांस को ग्रास की श्रेणी में रखा। इससे बांस उद्योग को नई पहचान मिली और आज असम में बांस से बनी इतनी शानदार इमारत इसका उदाहरण है।”