प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई के पाली हिल स्थित उनके आलीशान आवास ‘अबोड’ को अटैच (कुर्क) कर दिया है। एजेंसी के अनुसार इस संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब ₹3,716 करोड़ बताई जा रही है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है।
जानकारी के मुताबिक, यह 17 मंजिला लक्ज़री इमारत मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल में स्थित है और इसे देश की सबसे महंगी निजी संपत्तियों में गिना जाता है। ED की ओर से जारी अस्थायी अटैचमेंट आदेश के बाद अब इस संपत्ति की खरीद-फरोख्त या हस्तांतरण पर रोक लग गई है। जब तक जांच पूरी नहीं होती या सक्षम प्राधिकारी से राहत नहीं मिलती, तब तक इस संपत्ति में किसी तरह का लेन-देन संभव नहीं होगा।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कथित बैंक फ्रॉड और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच के सिलसिले में की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कंपनियों को दिए गए बड़े कर्ज का इस्तेमाल तय नियमों के तहत हुआ या नहीं। आरोप है कि कुछ ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया और उसे अन्य कंपनियों या संबंधित संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कई कंपनियां और कारोबारी लेन-देन जांच के दायरे में हैं। ED ने पहले भी अनिल अंबानी समूह से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी और दस्तावेजों की जांच की थी। एजेंसी बैंक खातों, वित्तीय ट्रांजैक्शन्स और कॉर्पोरेट संरचना की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
इस कार्रवाई के बाद कारोबारी और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संपत्ति का अटैच होना यह संकेत देता है कि जांच एजेंसी मामले को गंभीरता से ले रही है। हालांकि, अंतिम फैसला अदालत और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष पेश सबूतों के आधार पर ही होगा।
कानूनी प्रक्रिया के तहत, ED द्वारा जारी अस्थायी अटैचमेंट आदेश को आगे एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने पेश किया जाएगा। यदि वहां से इसे मंजूरी मिलती है तो अटैचमेंट जारी रहेगा, अन्यथा राहत भी मिल सकती है। इस बीच, संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में ED ने कई बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कार्रवाई की है। ऐसे मामलों में संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करना जांच प्रक्रिया का हिस्सा होता है, ताकि कथित अवैध संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। बाजार और उद्योग जगत की नजरें अब इस केस की अगली कानूनी कार्यवाही पर टिकी हैं।
















