मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी खाड़ी देशों के दौरे पर पहुंची हैं। शुक्रवार को वह सऊदी अरब के जेद्दा पहुंचीं, जहां उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। यह दो दिवसीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
खाड़ी देशों के समर्थन और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य उन खाड़ी देशों के प्रति समर्थन जताना है, जो ईरानी हमलों का सामना कर रहे हैं। साथ ही इटली अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए भी सक्रिय हो गया है। मेलोनी की यात्रा में सऊदी अरब के अलावा कतर और यूएई भी शामिल हैं।
युद्ध के बाद पहली EU नेता की यात्रा
फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल से जुड़े संघर्ष के बाद यह किसी यूरोपीय संघ के नेता की पहली सऊदी यात्रा मानी जा रही है। इस कदम को कूटनीतिक और ऊर्जा रणनीति दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
गैस सप्लाई पर पड़ा असर
युद्ध से पहले इटली की करीब 10% गैस जरूरत कतर से आने वाली LNG से पूरी होती थी, जबकि तेल आयात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 12% थी। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होने के बाद अप्रैल से जून के बीच आने वाले 10 LNG कार्गो फंस गए हैं, जिससे इटली की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।
कतर की LNG क्षमता भी प्रभावित
कतर एनर्जी के अनुसार, ईरानी हमलों के चलते देश की LNG निर्यात क्षमता का करीब 17% हिस्सा प्रभावित हुआ है। इससे यूरोपीय देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए इटली अब अमेरिका की ‘गोल्डन पास LNG’ परियोजना से गैस आयात शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून से इस नई सप्लाई व्यवस्था की शुरुआत हो सकती है।
ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता
मेलोनी का यह दौरा दिखाता है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर यूरोपीय देश कितने सतर्क हो गए हैं। खाड़ी देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर इटली अपनी ऊर्जा जरूरतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर कम किया जा सके।
Read More
GT और RR के बीच होगी कांटे की टक्कर, नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रोचक मुकाबला

