मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान मंगलवार तक सीजफायर कर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता, तो अमेरिका बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि शांति समझौता न होने पर ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान ने अल्टीमेटम को किया खारिज
ट्रंप की इस चेतावनी को ईरान ने गंभीरता से लेने के बजाय खारिज कर दिया है। ईरान के जिम्बाब्वे स्थित दूतावास ने व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हमने चाबियां खो दी हैं,” जिससे अमेरिकी बयान का मजाक उड़ाया गया।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण से बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखा है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% ईंधन परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका और इजरायल को हमलों से हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा। अन्यथा, ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने की नीति पर कायम रहेगा।
दोनों पक्षों के बीच बढ़ता टकराव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वाशिंगटन क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
लगातार एक महीने से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से कई देशों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है, जिसमें भारत भी शामिल है।
कूटनीति और सैन्य तनाव साथ-साथ
मौजूदा हालात में एक तरफ सैन्य तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। हालांकि अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।
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