Monday, March 2, 2026
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महाराष्ट्र की राजनीति में छिड़ा सियासी घमासान… भाजपा उम्मीदवारों की नवनीत राणा को निकालने की मांग

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महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों में भाजपा ने एक बार फिर यह साबित किया है कि प्रदेश में उसका राजनीतिक आधार मजबूत हुआ है। हालांकि, इसी बीच अमरावती नगर निगम चुनाव से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने सियासी हलकों में हल्की गर्माहट पैदा कर दी है। दरअसल, अमरावती नगर निगम चुनाव में भाजपा के 22 उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पूर्व सांसद नवनीत राणा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन उम्मीदवारों ने नवनीत राणा को पार्टी के खिलाफ कथित तौर पर प्रचार करने का दोषी ठहराते हुए उन्हें भाजपा से निष्कासित करने की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं में से सिर्फ दो उम्मीदवार चुनाव जीत पाए, जबकि 20 को हार का सामना करना पड़ा। उम्मीदवारों का आरोप है कि अमरावती की पूर्व लोकसभा सांसद नवनीत राणा ने भाजपा उम्मीदवारों को खुलेआम “नकली” करार दिया और अपने पति रवि राणा की पार्टी, युवा स्वाभिमान पार्टी, के प्रत्याशियों को “असली भाजपा उम्मीदवार” बताकर प्रचार किया। गौरतलब है कि नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा और विधायक रवि राणा की युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच गठबंधन टूट गया था। इसके बावजूद, एक स्थानीय भाजपा नेता ने दावा किया था कि नवनीत राणा पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करती रहेंगी। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद तस्वीर कुछ और ही नजर आई।

अमरावती नगर निगम की कुल 87 सीटों में से भाजपा को 25 सीटों पर जीत मिली। वहीं युवा स्वाभिमान पार्टी और कांग्रेस ने 15-15 सीटें, एआईएमआईएम ने 12, एनसीपी ने 11, शिवसेना और बसपा ने 3-3, शिवसेना (यूबीटी) ने 2 और वंचित बहुजन अघाड़ी ने 1 सीट हासिल की। चुनाव में मिली हार से आहत भाजपा के उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि उनकी हार जनता की नाराजगी के कारण नहीं, बल्कि नवनीत राणा के कथित पार्टी-विरोधी प्रचार का नतीजा है।

पत्र में उन्होंने लिखा… “हम पार्टी के समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता हैं और समाज से गहराई से जुड़े हुए हैं। इस चुनाव में हमारी हार विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि वरिष्ठ भाजपा नेता नवनीत राणा द्वारा खुलेआम पार्टी के खिलाफ प्रचार करने के कारण हुई है। उम्मीदवारों ने चेतावनी दी है कि यदि नवनीत राणा के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें पार्टी से बाहर नहीं किया गया, तो भविष्य में वह अमरावती शहर में भाजपा की राजनीतिक मौजूदगी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।