Wednesday, March 4, 2026
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ट्रंप ने टैरिफ का किया ऐलान तो भड़का चीन, कहा….किसी भी युद्ध के लिए हम तैयार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मैक्सिको और कनाडा से आयात पर लगाया गया नया 25 फीसदी टैरिफ मंगलवार से लागू हो गया। वहीं, चीनी वस्तुओं पर ड्यूटी दोगुनी कर 20 फीसदी कर दी गई। इसके साथ ही इन तीनों व्यापारिक साझेदारों के साथ अमेरिका का नया व्यापारिक टकराव शुरू हो गया।

टैरिफ लागू होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने कहा था कि तीनों देश अमेरिका में घातक फेंटेनाइल ओपिओइड और अन्य दवाओं के प्रवाह को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में विफल रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका टैरिफ वॉर या किसी भी तरह का टकराव चाहता है तो चीन अंत तक लड़ने के लिए तैयार है।

चीन ने किया पलटवार

चीन में अमेरिकी दूतावास ने डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के बारे में सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अगर अमेरिका युद्ध चाहता है, चाहे वह टैरिफ युद्ध हो, व्यापार युद्ध हो या कोई अन्य प्रकार का युद्ध हो, “हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं’ वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशाना साधते हुए लिखा, “चीन को धमकी देना काम नहीं आएगा। टैरिफ को लेकर चीन का पलटवार अमेरिका के लिए झेलना आसान नहीं होगा और एक्सपर्ट्स सवाल उठा रहे हैं कि क्या अमेरिका की जनता कीमतों में भारी इजाफे को बर्दाश्त करने के लिए तैयार है?’

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि धमकियों से चीन नहीं डरता और दबाव या जबरदस्ती से निपटने का यह सही तरीका नहीं है, उन्होंने फेंटेनाइल संकट के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि चीन ने इस मुद्दे पर अमेरिका की सहायता के लिए मजबूत कदम उठाए हैं, लेकिन अमेरिका ने चीन पर दोष मढ़ने और उसे बदनाम करने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि चीन ने पलटवार करते हुए 10 मार्च से कुछ अमेरिकी आयातों पर 10%-15% का अतिरिक्त टैरिफ लगाने और नामित अमेरिकी संस्थाओं के लिए कुछ नए निर्यात प्रतिबंधों की घोषणा की।

‘फेंटेनाइल संकट के लिए अमेरिका जिम्मेदार’

फेंटेनाइल संकट को लेकर चीन ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए चीन ने कहा, ‘इस संकट के लिए अमेरिका ही जिम्मेदार है.. अमेरिकी लोगों के प्रति मानवता और सद्भावना की भावना से हमने इस मुद्दे से निपटने में अमेरिका की मदद करने के लिए हमें कई कड़े कदम उठाए हैं। हमारी कोशिश को स्वीकार करने की जगह अमेरिका हम पर ही दोष लगा रहा है और बदनाम करने की साजिश कर रहा ही, वो हमें मदद करने के लिए सजा दे रहे हैं, यह अमेरिका की समस्या का समाधान नहीं करेगा, इससे दोनों देशों के बीच सहयोग कमजोर होगा।