गृह मंत्रालय ने 2027 की जनगणना के लिए नया नोटिफिकेशन किया जारी

देश में 2027 में होने वाली भारत की 16वीं जनगणना के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक नया आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस नोटिफिकेशन में जनगणना के दौरान इकट्ठा की जाने वाली जानकारी की विस्तृत सूची शामिल है

Jan 23, 2026 - 08:18
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गृह मंत्रालय ने 2027 की जनगणना के लिए नया नोटिफिकेशन किया जारी

देश में 2027 में होने वाली भारत की 16वीं जनगणना के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक नया आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस नोटिफिकेशन में जनगणना के दौरान इकट्ठा की जाने वाली जानकारी की विस्तृत सूची शामिल है, और अधिकारियों को घरों और परिवारों का डेटा एकत्र करने का अधिकार प्रदान किया गया है। जनगणना का पहला चरण हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग पर केंद्रित होगा, जिसमें यह निर्धारित किया जाएगा कि देश में कितने घर और परिवार हैं तथा उनकी अवस्थाएँ कैसी हैं। इसके तहत 33 विशिष्ट सवाल शामिल हैं, जिनके जवाब क्षेत्रीय जनगणना अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर लिए जाएंगे।  

क्या जानकारी मांगी जाएगी?

इस नोटिफिकेशन के मुताबिक, 2027 की जनगणना में उल्लिखित बिंदुओं पर डेटा एकत्र करने का अधिकार दिया गया है, जिससे देश के हर घर और परिवार का विस्तृत विवरण उपलब्ध होगा।

विशेष रूप से इस बार:

1 घरों के भौतिक विवरण जैसे दीवार, छत, फर्श के प्रकार पूछे जाएंगे।

2 परिवार के सदस्यों, उनके नाम, रसोई, पानी, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाओं का ब्यौरा लिया जाएगा।

3 सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को समझने वाले सवाल भी शामिल हैं। 


जनगणना का महत्व और प्रक्रिया

2027 की जनगणना को भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना के रूप में संचालित करने की योजना है। सरकार ने इसके लिए तकनीकी तैयारियों के साथ-साथ बजट और समय-सीमा भी तय की है। यह कदम पिछले 16 साल में पहली बार पूर्ण जनगणना सुनिश्चित करेगा, जिसने 2011 के बाद स्थगित रही थी।पहले चरण में मकान-सूची एवं हाउसिंग से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाएगा, जबकि बाद में जनसंख्या की गिनती की जाएगी। यह प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होकर मार्च 2027 तक दो चरणों में चलेगी।

सरकारी लक्ष्य और आगे की दिशा

सरकार का कहना है कि विस्तृत और डिजिटल रूप से संकलित यह डेटा नीति-निर्माण, संसाधन आवंटन और विकास कार्यक्रमों के निदान में मदद करेगा। इसके अलावा, पहली बार व्यापक स्तर पर जातिगत डेटा को भी शामिल किया जा रहा है, जिससे सामाजिक-आर्थिक योजनाओं को अधिक लक्ष्य-आधारित बनाया जा सकेगा

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