PM मोदी ने ट्रंप को दिया 4.5 लाख करोड़ का झटका, जानें कैसे
भारत ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में अपना निवेश 21 फीसदी घटा दिया है, जिससे अमेरिका को करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये 50 अरब डॉलर का आर्थिक झटका लगा है।
भारत ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में अपना निवेश 21 फीसदी घटा दिया है, जिससे अमेरिका को करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये 50 अरब डॉलर का आर्थिक झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक, यह गिरावट भारत की विदेशी मुद्रा रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
भारत का निवेश अब 190 अरब डॉलर
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2024 के मुकाबले 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की अमेरिकी ट्रेजरी में हिस्सेदारी 241.4 अरब डॉलर से घटकर 190.7 अरब डॉलर रह गई है। यह गिरावट बीते चार वर्षों में पहली बार दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि भारत ने सिर्फ एक साल में लगभग 50 अरब डॉलर का निवेश वापस खींच लिया, जिससे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली पर असर पड़ा है।
रिटर्न बढ़ने के बावजूद घटाई हिस्सेदारी
दिलचस्प बात यह है कि भारत ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब अमेरिकी बॉन्ड्स पर रिटर्न बढ़कर 4.8% तक पहुंच गया है, जो विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक माना जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत का यह फैसला रिटर्न के बजाय रणनीतिक कारणों से प्रेरित है।
भारत की नई रणनीतियों पर फोकस
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा सोने, अन्य देशों के सरकारी बॉन्ड्स और गैर-डॉलर संपत्तियों में निवेश कर रहा है। वैश्विक तनाव और अमेरिका की नीतिगत अस्थिरता को देखते हुए, भारत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
अमेरिका पर भारत की रणनीति का असर
अमेरिकी ट्रेजरी में भारत के निवेश में आई यह गिरावट अमेरिका के लिए वित्तीय दबाव का संकेत है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने की नीति के जवाब में भारत ने यह रणनीतिक आर्थिक कदम उठाया। इससे न केवल अमेरिकी ट्रेजरी बांड्स की डिमांड कम हुई है, बल्कि अमेरिकी मुद्रा डॉलर की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर भी असर पड़ा है।
What's Your Reaction?