Delhi Blast मामले में बड़ा खुलासा, ‘घोस्ट सिम’ के जरिए आकाओं से कनेक्ट थे आतंकी
लाल किले पर हुए बम धमाके को लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन आतंकवादी हमले में घायल हुए कई पीड़ित अभी भी सरकारी मदद और मुआवज़े का इंतज़ार कर रहे हैं।
दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट मामले की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि तथाकथित ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी नेटवर्क से जुड़े आरोपी-जिनमें पेशे से डॉक्टर जैसे उच्च शिक्षित लोग भी शामिल हैं जो पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से संपर्क बनाए रखने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे।
जांच अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने सुरक्षा निगरानी से बचने के लिए एक सुनियोजित ‘डुअल-फोन स्ट्रैटेजी’ अपनाई थी। प्रत्येक आरोपी के पास दो या उससे अधिक मोबाइल फोन होते थे। एक फोन पूरी तरह वैध और उनके नाम पर रजिस्टर्ड होता था, जिसका उपयोग सामान्य जीवन और पेशेवर कामों के लिए किया जाता था। वहीं दूसरा फोन केवल आतंकी गतिविधियों और पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से संपर्क के लिए रखा जाता था।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाक हैंडलरों से साधा संपर्क
इन ‘टेरर फोन्स’ के माध्यम से आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से जुड़े रहते थे। जांच में सामने आया है कि इन हैंडलरों के कोडनेम ‘उकासा’, ‘फैजान’ और ‘हाशमी’ थे। विस्फोट से पहले मारा गया डॉ. उमर नबी भी इसी नेटवर्क का हिस्सा था, जो विस्फोटकों से भरी गाड़ी चला रहा था।
आधार के दुरुपयोग से बनी ‘घोस्ट सिम’
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह भी उजागर हुआ कि सेकेंडरी मोबाइल फोनों में इस्तेमाल की जा रही सिम कार्ड्स निर्दोष नागरिकों के नाम पर जारी की गई थीं। इन सिमों को हासिल करने के लिए आधार विवरण का दुरुपयोग किया गया। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इसी कड़ी में एक अलग सिम-फर्जीवाड़ा रैकेट का भी भंडाफोड़ किया है, जहां नकली आधार कार्ड के जरिए सिम जारी की जा रही थीं।
एजेंसियों के मुताबिक, इन सिम कार्ड्स से जुड़े मैसेजिंग अकाउंट्स पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भी नियमित रूप से सक्रिय पाए गए। आतंकियों ने उन तकनीकी सुविधाओं का लाभ उठाया, जिनमें फिजिकल सिम हटने के बावजूद मैसेजिंग एप्स को चलाया जा सकता है।
यूट्यूब से दी गई आईईडी ट्रेनिंग
जांच अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तानी हैंडलरों ने इन एप्स के जरिए आरोपियों को यूट्यूब से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने की ट्रेनिंग लेने के निर्देश दिए थे। शुरुआत में ये युवक सीरिया और अफगानिस्तान जैसे संघर्षग्रस्त इलाकों में जाने की योजना बना रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें भारत के ‘हिंटरलैंड’ क्षेत्रों में ही हमले अंजाम देने के लिए तैयार किया गया।
टेलीकॉम एक्ट 2023 के तहत सरकार का कड़ा कदम
इन डिजिटल खामियों को बंद करने के लिए केंद्र सरकार ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियमों के तहत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत आदेश दिया गया है कि 90 दिनों के भीतर यह सुनिश्चित किया जाए कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप्स केवल तभी कार्य करें जब डिवाइस में सक्रिय फिजिकल सिम मौजूद हो। सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी डिवाइस से सक्रिय सिम हटा दी जाती है, तो टेलीकॉम ऑपरेटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित यूजर को ऐसे एप्स से लॉगआउट कर दिया जाए।
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