Haryana : Delhi Blast केस में खुलासा, अल-फलाह यूनिवर्सिटी की परिसर को ED जल्द कर सकती है कुर्क
प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी परिसर को अस्थायी रूप से सील करने की तैयारी में है।
दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से जुड़े मामले में फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी कई दिनों से सुर्खियों में है। जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी परिसर को अस्थायी रूप से कुर्क करने की तैयारी में है।
आतंकी उमर नबी ने इसी यूनिवर्सिटी से ली थी शिक्षा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. उमर नबी ने सुसाइड बॉम्बर बनकर दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए ब्लास्ट को अंजाम दिया था, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी। इस हमले के बाद जांच एजेंसियों ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को आतंकी मॉड्यूल का केंद्र मानते हुए जांच तेज कर दी।
दो डॉक्टर गिरफ्तार
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस मामले में दो अन्य डॉक्टरों डॉ. शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि डॉ. मुजम्मिल ने ब्लास्ट के लिए विस्फोटक जमा किए, जबकि डॉ. शाहीन सईद ने धन संबंधी मदद की। एजेंसी ने यूनिवर्सिटी के कई अन्य कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया है।
ED कर रही है फंडिंग की जांच
प्रवर्तन निदेशालय यह जांच कर रहा है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया गया पैसा कहीं ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ यानी अपराध से जमा किया गया धन तो नहीं है। ED ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार कर लिया था। जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी ने खुद को UGC और NAC से मान्यता प्राप्त बताकर छात्रों को गुमराह किया, जबकि उसके पास कोई वैध मान्यता नहीं थी।
करोड़ों की कमाई का खुलासा
ED की रिपोर्ट के अनुसार, चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के नाम पर विदेशों से अवैध फंडिंग हासिल की। झूठी मान्यता के नाम पर छात्रों से भारी फीस वसूली गई। एजेंसी के मुताबिक, इसी तरीके से यूनिवर्सिटी ट्रस्ट ने 415.10 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
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