विकसित भारत-G Ram G बना कानून, बिल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किए हस्ताक्षर
VB-G RAM G बिल को राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिल गई है और अब यह कानून बन गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-जी राम जी विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह अब जी राम जी कानून लागू हो गया है। नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली मजदूरी रोजगार गारंटी को बढ़ाकर अब 125 दिन प्रति वर्ष कर दिया गया है।
यह विधेयक गुरुवार को संसद में विपक्ष के कड़े विरोध के बीच पारित हुआ। इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने महात्मा गांधी के आदर्शों को कमजोर किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उन्हें मजबूती दी है। मनरेगा की जगह नया कानून लाने और उसमें से गांधी नाम हटाने को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया।
मनरेगा को लेकर कांग्रेस पर निशाना
शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने मनरेगा को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया। उन्होंने यूपीए और एनडीए शासनकाल के आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जहां करीब 1660 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए थे, वहीं मोदी सरकार के दौरान यह संख्या बढ़कर 3210 करोड़ श्रम दिवस तक पहुंच गई।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 48 प्रतिशत थी, जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बढ़कर 56.73 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने केवल गांधी का नाम इस्तेमाल किया, जबकि उनके सिद्धांतों को लागू करने का काम मौजूदा सरकार ने किया।
क्या है ‘जी राम जी’ कानून ?
जी राम जी कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, आजीविका को मजबूत करना और कृषि उत्पादकता में सुधार लाना है।
इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साथ ही इसमें स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, श्रमिकों की सुरक्षा और विभिन्न योजनाओं के बेहतर तालमेल पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण आय सुरक्षा को मजबूत करेगा, कृषि और रोजगार के बीच संतुलन बनाएगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देगा। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी आधारित रोजगार के अवसरों को और विस्तार देने की योजना है।
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