UCC पर सभी वर्गों की सहमति जरूरी, समाज में नहीं होना चाहिए विभाजन- RSS प्रमुख
उन्होंने बताया कि आरएसएस का दृष्टिकोण यह है कि “देश में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक जैसी कोई चीज़ नहीं है, हम सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं।”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार ( 08 February 2026 ) को समान नागरिक संहिता (UCC) पर दोहरा जोर दिया कि इसे केवल बातचीत और आम सहमति के साथ ही बनाया जाना चाहिए और इससे समाज में किसी प्रकार का विभाजन नहीं उत्पन्न होना चाहिए।
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि समान नागरिक संहिता को सभी समुदायों के विश्वास में लेकर तैयार करने की आवश्यकता है ताकि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता बनी रहे।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तराखंड में UCC लागू करते समय लगभग तीन लाख सुझाव लिए गए और सभी हितधारकों से संवाद के बाद ही कानून बनाया गया, और यही प्रक्रिया पूरे देश के लिए एक मॉडल हो सकती है।
भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी के नाम पर मतभेद या टकराव पैदा नहीं होना चाहिए और सभी वर्गों को इसमें शामिल करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि आरएसएस का दृष्टिकोण यह है कि “देश में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक जैसी कोई चीज़ नहीं है, हम सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं।”
समाज में एकता और संवाद पर दिया जोर
मोहन भागवत ने कहा कि समाज के सभी हिस्सों के बीच विश्वास, मित्रता और संवाद की जरूरत है। उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ सकारात्मक बातचीत तथा भरोसे को बढ़ावा देने पर जोर दिया और कहा कि धर्म का असली अर्थ शांति और आध्यात्मिकता होना चाहिए।
वहीं उन्होंने कम्युनिस्ट आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले 100 वर्षों में उनका आधार क्यों नहीं बढ़ा, अगर वे चाहें तो इस पर आरएसएस उन्हें मार्गदर्शन दे सकता है।
उसी कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने यह भी बताया कि RSS को सत्ता या लोकप्रियता की इच्छा नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य सामाजिक संगठन और राष्ट्रीय सेवा है।
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