बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले तेज, 24 घंटे में दूसरी हत्या; मणि चक्रवर्ती की चाकू घोंपकर हत्या
देश में जारी अशांति के बीच सोमवार रात एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसमें मणि चक्रवर्ती नाम के हिंदू कारोबारी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। यह बीते 24 घंटे में हिंदू समुदाय के खिलाफ दूसरा घातक हमला है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश में जारी अशांति के बीच सोमवार रात एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसमें मणि चक्रवर्ती नाम के हिंदू कारोबारी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। यह बीते 24 घंटे में हिंदू समुदाय के खिलाफ दूसरा घातक हमला है।
दुकान पर हमला, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
मणि चक्रवर्ती नरसिंदी जिले के पलाश उपजिले स्थित चारसिंदुर बाजार में किराने की दुकान चलाते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार रात वे अपनी दुकान पर मौजूद थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर अचानक चाकू से हमला कर दिया। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में या अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
घटना एक व्यस्त बाजार इलाके में हुई, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है और प्रशासन की ओर से भी इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
एक दिन पहले भी हुई थी हिंदू युवक की हत्या
इससे पहले 5 जनवरी को बांग्लादेश के जेसोर जिले के मोनिरामपुर उपजिला स्थित कपालिया बाजार में राणा प्रताप बैरागी नाम के हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शाम करीब 5:45 बजे अज्ञात हमलावरों ने राणा प्रताप बैरागी पर अचानक गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी केशवपुर उपजिला के अरुआ गांव के निवासी थे और तुषार कांती बैरागी के पुत्र थे। वे किसी सामान्य काम से बाजार आए थे, तभी उन्हें निशाना बनाया गया।
लगातार बढ़ रही हिंदुओं की हत्याएं
मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शेख हसीना सरकार के हटने के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्व अधिक सक्रिय हो गए हैं। अंतरिम सरकार के दौर में कानून-व्यवस्था कमजोर होने का फायदा उठाकर अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कई मामलों में ईशनिंदा के आरोप, भीड़ हिंसा या फिर निजी रंजिश के नाम पर हिंदुओं पर हमले किए जा रहे हैं।
हाल के महीनों में दर्ज प्रमुख घटनाएं
* दिसंबर 2025: मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या
* दिसंबर 2025: बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या
* दिसंबर 2025: अमृत मंडल की भीड़ हिंसा में मौत
* जनवरी 2026: शरियतपुर में खोकोन दास को जिंदा जलाया गया
* 5 जनवरी 2026: जेसोर में राणा प्रताप बैरागी की सरेआम गोली मारकर हत्या
* 6 जनवरी 2026: नरसिंदी में मणि चक्रवर्ती की चाकू घोंपकर हत्या
सरकार ने माना अपराध, लेकिन हालात जस के तस
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इन घटनाओं को आपराधिक कृत्य तो माना है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन पर लगाम लगती नहीं दिख रही। लगातार हो रही हत्याओं से अल्पसंख्यक समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।
भारत ने जताया विरोध, सुरक्षा की मांग
भारत ने इन हत्याओं को लेकर बांग्लादेश सरकार से कड़ा विरोध दर्ज कराया है और वहां रहने वाले हिंदुओं व अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन घटनाओं की निंदा हो रही है, लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अपराध रुकते नजर नहीं आ रहे हैं।
बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही ठोस और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति और गंभीर हो सकती है। मणि चक्रवर्ती की हत्या ने एक बार फिर देश में अल्पसंख्यक सुरक्षा के सवाल को केंद्र में ला खड़ा किया है।
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