Thursday, February 19, 2026
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हरियाणा में 21वां पशुधन गणना अभियान शुरू, पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने की शुरूआत

एमएच वन ब्यूरो, चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने यमुनानगर जिला के रादौर क़स्बा से प्रदेश के 21वें पशुधन गणना अभियान का शुभारम्भ किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 1919 में पहली पशुधन गणना के आयोजन के बाद से हर पांच साल के अंतराल में पशुधन गणना का आयोजन किया जाता है, जो कि पशुपालन में नीति निर्माण और पशुपालन क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है। इस पशु गणना में पूरे प्रदेश में घर-घर जा कर एक व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा जिसमें पालतू जानवरों और पोल्ट्री के बारे में आंकड़े एकत्र किए जाएंगें। इस गणना में पशुधन की विभिन्न प्रजातियां जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर, ऊंट, घोड़ा आदि के अलावा पोल्ट्री पक्षियों की गिनती भी शामिल हैं। यह पशुधन गणना पशुपालन से जुड़े नागरिकों के पास उपलब्ध डेयरीउपकरणों की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध कराएगी, जो राष्ट्र व प्रदेश के पशुधन क्षेत्र के हित के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश में कुल 1079 पशु चिकित्सालयों, 1796 पशु औषधालयों, 7 पशु चिकित्सा पॉलिक्लीनिक/पालतू पशु चिकित्सा केंद्र. 41 पैरा-क्लिनिकल/सहायक संस्थान के अलावा हिसार में स्थित राजकीय पशुधन फार्म को मिलाकर कुल 2928 पशु चिकित्सा संस्थानों का बुनियादी ढांचा विकसित किया गया, जिसकी सहायता से पशुओं के रोगों के उपचार एवं बचाव तथा पशुओं की नस्ल सुधार हेतु चलाई जा रही योजनाओं की वजह से पशुओं की उत्पादन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न जिलों में 70 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाईयां चलाई जा रही हैं जिसकी मदद से पशुपालकों को उनके घर द्वार पर लगातार (दिन-रात) पशु स्वास्थ्य और प्रजनन सेवाएँ टोल फ्री नंबर 1962 के माध्यम से कॉल के आधार पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि पशुपालन के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों तथा राज्य के प्रगतिशील पशुपालकों के प्रयास से राज्य का वार्षिक दूध उत्पादन 119.65 लाख टन हो गया है। राज्य में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध उपलब्धता 1098 ग्राम हो गई है जोकि राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धता 459 ग्राम की दोगुनी से भी काफी ज्यादा है। पशुओं की दूध उत्पादकता को विकसित देशों के उन्नत पशुओं के स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है जिसके लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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