Thursday, February 19, 2026
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10 या 11 अक्टूबर, किस दिन करें कन्या पूजन? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुका है। नवरात्रि का त्योहार 9 दिनों तक चलता है, जिसमें देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में पूजा-पाठ करने के साथ-साथ व्रत रखना भी शुभ माना जाता है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। जहां कुछ लोग अष्टमी तिथि को देवी दुर्गा की पूजा के बाद कन्या पूजन करते हैं, वहीं कुछ लोग नवमी की पूजा के बाद कन्या पूजन करते हैं। देश के कई राज्यों में कन्या पूजन को कुमारिका पूजन, कंजक और कन्या पूजन के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस साल किस दिन कन्या पूजन करना शुभ रहेगा।

कन्या पूजन का महत्व

कन्या पूजन के लिए घर में पूरी, छोले, चने और हलवा बनाया जाता है। 2 से 8 साल की 7 या 11 कन्याओं और एक लड़के को घर बुलाया जाता है। सभी कन्याओं का पूजन किया जाता है। उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है। अंत में हर कन्या को पैसे और उपहार देकर विदा किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इसी कारण नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन कर मां दुर्गा को प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है। इससे मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

कन्या पूजन कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि 10 अक्टूबर 2024 को दोपहर 12:31 बजे से शुरू हो रही है, जो 11 अक्टूबर 2024 को दोपहर 12:06 बजे तक रहेगी। 11 अक्टूबर 2024 को अष्टमी तिथि समाप्त होते ही नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। नवमी तिथि 12 अक्टूबर 2024 को सुबह 10:57 बजे समाप्त होगी।

ऐसे में उदयातिथि के आधार पर इस साल शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का व्रत एक ही दिन 11 अक्टूबर को रखा जाएगा, जिस दिन कन्या पूजन भी शुभ रहेगा। कन्या पूजन करने का शुभ मुहूर्त 11 अक्टूबर 2024 को सुबह 10:41 बजे से पहले है, जिसके बाद दोपहर 12:08 बजे तक राहुकाल रहेगा।

कन्या पूजन की विधि

  • कन्या पूजन के दिन सुबह जल्दी उठें।
  • स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • देवी दुर्गा की पूजा करने के बाद व्रत का संकल्प लें और कन्या पूजन करें।
  • कन्या पूजन के लिए घर पर अपने हाथों से चना, पूरी, हलवा और छोले बनाएं।
  • सबसे पहले माता रानी को ये सभी चीजें अर्पित करें।
  • इसके बाद घर आई हुई कन्याओं के पैर साफ पानी से धोएं।
  • कन्याओं को तिलक लगाएं और उनके हाथों पर रक्षा सूत्र बांधें।
  • कन्याओं को प्रसाद खिलाएं।
  • सभी कन्याओं को अपनी क्षमता के अनुसार पैसे या उपहार अवश्य दें।
  • अंत में कन्याओं के पैर छूकर उन्हें विदा करें।
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