Friday, February 13, 2026
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बाल-बाल बची ट्रूडो सरकार, कनाडा के संसद में फेल हुआ अविश्वास मत

कनाडा में कंजर्वेटिव पार्टी द्वारा राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव गिर गया है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बुधवार को संसद में विश्वास मत जीत लिया और अपनी सरकार को गिरने से बचा लिया। हालांकि, सत्ता पर उनकी पकड़ अभी भी कमजोर है और विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने अगले हफ्ते फिर से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। संसद में घंटों चली गरमागरम बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसदों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। काफी देर तक चले हंगामे के बाद कंजर्वेटिव प्रस्ताव को 211 के मुकाबले 120 वोटों से खारिज कर दिया गया।

कनाडा के मुख्य विपक्षी नेता पियरे पोलीवरे चुनावों से पहले ही ट्रूडो को सत्ता से बेदखल करने में लगे हुए हैं, जबकि ट्रूडो की लिबरल पार्टी की सहयोगी एनडीपी ने भी इससे दूरी बना ली है। हालांकि, इस प्रस्ताव में जगमीत सिंह की अगुवाई वाली एनडीपी ने लिबरल के पक्ष में वोट किया है। कंजर्वेटिव लगातार चुनौती दे रहे हैं कंजर्वेटिव नेता पियरे पोलीवरे ने देश के खराब हालातों के लिए ट्रूडो को जिम्मेदार ठहराया है।

कनाडा में बढ़ती महंगाई, घर के किराए, बेरोजगारी और टैक्स बढ़ोतरी के बाद ट्रूडो पर नेतृत्व में विफलता का आरोप लगाया गया है। देश में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन बढ़ रहे हैं। पियरे पोलिएवर ने कहा, “नौ साल की लिबरल सरकार के बाद कनाडा की हालत खराब है। वहीं, लिबरल पार्टी की सहयोगी एनडीपी के हटने से ट्रूडो सरकार और भी कमजोर हो गई है।

पोल में ट्रूडो पिछड़ रहे हैं

हाल ही में एंगस रीड पोल के अनुसार, कंजर्वेटिव पार्टी लिबरल से काफी आगे दिखाई गई है, जिसमें 43 फीसदी वोट कंजर्वेटिव के पास हैं, जबकि सत्ताधारी पार्टी को सिर्फ 21 फीसदी लोगों ने वोट दिया है। एनडीपी को 19 फीसदी समर्थन मिला है, एनडीपी नेता जगमीत सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी संसद में हर बिल का मूल्यांकन करेगी, उसके बाद ही तय करेगी कि किस तरह से वोट करना है।

क्या है कनाडा की संसद का समीकरण?

सत्ता में बने रहने के लिए ट्रूडो के लिए सदन में भरोसा बनाए रखना जरूरी है। फिलहाल लिबरल पार्टी के पास 153 सांसद हैं, जबकि मुख्य विपक्षी कंजर्वेटिव के पास 119, ब्लॉक क्यूबेकॉइस के पास 33 और एनडीपी के पास 25 सीटें हैं। ट्रूडो की कमजोर होती सरकार लगातार मुश्किलों का सामना कर रही है। चुनौतियों का सामना करते हुए अल्पमत सरकार को सत्ता में बनाए रखने के लिए उन्हें अन्य दलों के समर्थन की जरूरत है। अगर वे इन दलों की मांगों को प्राथमिकता नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ विपक्षी दलों की स्थिति मजबूत हो सकती है।

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