इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह 2020 के हाथरस रेप और मर्डर केस की पीड़िता के परिवार को तीन महीने के अंदर गाज़ियाबाद या नोएडा में बसाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था करे। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि नई जगह पर बसने के बाद परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
दूसरी जगहों पर बसाने के विकल्प खारिज
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की बेंच ने राज्य सरकार के 22 फरवरी, 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें परिवार को कासगंज, एटा या अलीगढ़ में बसाने का विकल्प दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि सरकार गाज़ियाबाद या गौतम बुद्ध नगर में पुनर्वास की परिवार की मांग पर ठीक से विचार करने में नाकाम रही।
परिवार ने पहले हाथरस में रहने को लेकर चिंता जताई थी और नोएडा में बसने की मांग की थी, जहाँ उनके रिश्तेदार रहते हैं। हाई कोर्ट ने पहले राज्य को निर्देश दिया था कि वह परिवार की सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक भलाई और बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके पुनर्वास पर विचार करे।
कोर्ट ने राज्य की आलोचना की
कोर्ट ने अपने पिछले निर्देशों का पालन करने में राज्य की ओर से दिखाई गई “बेवजह की आनाकानी” की आलोचना की। कोर्ट ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि अगर आदेश लागू नहीं किया गया तो अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
यह मामला 2020 की हाथरस घटना के बाद हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई स्वतः संज्ञानकार्यवाही का हिस्सा है। अगली सुनवाई 30 नवंबर, 2026 के लिए तय की गई है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि परिवार की सुरक्षा, स्थिरता, सम्मान, पुनर्वास और बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए समय पर आदेश का पालन करना ज़रूरी है।
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