एनालॉग पनीर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने FSSAI के चेयरमैन और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सचिव को नोटिस भेजकर इस तरह के उत्पाद से जुड़े स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों के मुद्दों पर जानकारी मांगी है। NHRC ने FSSAI से पूछा है कि देश में एनालॉग पनीर की कानूनी और नियामकीय स्थिति क्या है और इसे किस आधार पर बाजार में अनुमति दी गई है। आयोग ने इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने एनालॉग पनीर की जांच की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी मांगी है।
इसमें बीटा-सिटोस्टेरॉल सहित उन मानकों और परीक्षणों की जानकारी शामिल है जिनके आधार पर ऐसे उत्पादों की जांच की जाती है। NHRC ने यह भी जानना चाहा है कि किसी उत्पाद को ‘एनालॉग पनीर’ के रूप में वर्गीकृत करने से उसकी सुरक्षा या संभावित जोखिम की श्रेणी पर कोई असर पड़ता है या नहीं। इसके अलावा, इसकी पोषण संबंधी संरचना को लेकर देशभर में उपलब्ध वैज्ञानिक आकलन की जानकारी भी मांगी गई है।
राज्यों से मांगी गई कार्रवाई की रिपोर्ट
NHRC ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भी नोटिस जारी किया है। उनसे एनालॉग पनीर के निर्माण, सप्लाई, बिक्री और इस्तेमाल से जुड़ी राज्यवार Action Taken Report मांगी गई है।
रिपोर्ट में यह बताना होगा कि इस संबंध में कितने निरीक्षण किए गए कितने नमूने जांच के लिए लिए गए जांच में कितने नियमों का उल्लंघन मिला और संबंधित मामलों में क्या कार्रवाई की गई। इस कदम के जरिए NHRC ने एनालॉग पनीर की सुरक्षा, नियमन और उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने लाने की कोशिश की है।