NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट(Delhi Special Court) ने तीन आरोपियों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। आरोपियों ने जांच में सहयोग करने के लिए अपनी इच्छा से लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की।
आरोपियों की ओर से कहा गया था कि वे बिना किसी दबाव के वैज्ञानिक जांच के लिए तैयार हैं। उनका दावा था कि इससे उनकी बेगुनाही सामने आएगी और जांच एजेंसी को मामले की निष्पक्ष जांच में मदद मिल सकेगी।
CBI ने टेस्ट की मांग का किया विरोध
सुनवाई के दौरान CBI ने आरोपियों की अर्जी का विरोध किया। जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि आरोपियों को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि जांच किस तरीके से की जाएगी। CBI ने यह भी बताया कि मामले में उसके पास आरोपों से जुड़े पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और जांच लगभग पूरी हो चुकी है।
एजेंसी ने तर्क दिया कि इस स्तर पर लाई डिटेक्टर या ब्रेन मैपिंग जैसी प्रक्रिया कराने की जरूरत नहीं है। CBI ने यह भी मांग की कि इस तरह की अर्जी दाखिल करने के लिए आरोपियों पर जुर्माना लगाया जाए।
20 हजार पन्नों की चार्जशीट पर टला फैसला
मामले में CBI ने करीब 20,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। अदालत ने इस पर तुरंत संज्ञान लेने के बजाय फैसला 12 अगस्त तक टाल दिया। कोर्ट ने माना कि दस्तावेजों की संख्या काफी ज्यादा है और उन्हें विस्तार से देखने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए।
अदालत ने तीनों आरोपियों की हिरासत भी 12 अगस्त तक बढ़ा दी है। इस मामले में CBI की जांच जारी है और अदालत अब चार्जशीट से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी। आरोपियों की ओर से लगातार अपनी बेगुनाही का दावा किया गया है जबकि CBI का कहना है कि जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त सामग्री सामने आई है।