श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के बीच मथुरा(Mathura) में 9 अगस्त को प्रस्तावित कारसेवा को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड स्थित चित्रकूट पीठ में हवन, यज्ञ और शिला पूजन का कार्यक्रम रखा गया है। इसके जरिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी है। चित्रकूट पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कारसेवा का आह्वान किया था। हालांकि, पहले बताए गए कार्यक्रम में बदलाव करते हुए फिलहाल धार्मिक अनुष्ठानों और शिला पूजन के माध्यम से अभियान शुरू करने की योजना बनाई गई है।
आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम में एक हजार से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं। इनमें 13 अखाड़ों के साधु-संतों के साथ अलग-अलग हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। आयोजक इस पहल को अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान को आगे बढ़ाने वाला अहम कदम बता रहे हैं।
अदालत के फैसले का सम्मान
हालांकि, कारसेवा के मुद्दे पर सभी हिंदू संगठनों का रुख एक जैसा नहीं है। विश्व हिंदू परिषद पहले ही संतों के कारसेवा आह्वान से दूरी जता चुका है। संगठन ने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही थी। ऐसे में मथुरा का यह कार्यक्रम धार्मिक गतिविधि के साथ-साथ कानूनी और प्रशासनिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CRPF और कोबरा कमांडो का फ्लैग मार्च
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के बीच कारसेवा के ऐलान को लेकर मथुरा प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। 8 अगस्त को CRPF और कोबरा कमांडो ने संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया। संभावित भीड़ और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन की ओर से संतों और कार्यक्रम से जुड़े लोगों से शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की गई है।
प्रशासन सख्त, कई संतों को नोटिस जारी
कारसेवा के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए कुछ संतों और धार्मिक व्यक्तियों को प्रशासन की ओर से नोटिस दिए जाने की खबर है। रिपोर्टों में साध्वी रत्नप्रभा और कथावाचक देवकीनंदन महाराज समेत कुछ अन्य नामों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी। वहीं, कारसेवा का समर्थन करने वाले लोग इसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के अगले चरण के तौर पर देख रहे हैं।
अदालत में चल रहा है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद
श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से सटी शाही ईदगाह को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थान श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा है और यहां पहले मंदिर होने की बात कही जाती है। मुस्लिम पक्ष इन दावों को स्वीकार नहीं करता। इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएं अदालतों में विचाराधीन हैं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी इस विवाद से जुड़े मुकदमों की सुनवाई हुई है। ऐसे में संतों की ओर से कारसेवा के आह्वान ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है। विवाद का अंतिम समाधान न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही तय होगा।