उत्तर प्रदेश सरकार(Yogi Government) ने श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए यूपी मजदूरी संहिता 2026 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। नई संहिता लागू होने के बाद राज्य में न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी कर्मचारी को तय न्यूनतम वेतन से कम भुगतान नहीं किया जा सकेगा। यह नियम सभी क्षेत्रों, संस्थानों और रोजगार के प्रकारों पर लागू होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर योग्य कर्मचारी को उसके काम के अनुसार निर्धारित न्यूनतम मजदूरी मिले।
ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना भुगतान
नई मजदूरी संहिता में कर्मचारियों के अतिरिक्त काम को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अगर किसी कर्मचारी से तय समय से ज्यादा काम कराया जाता है, तो नियोक्ता को उसे ओवरटाइम के लिए सामान्य दर से दोगुना भुगतान करना होगा।
इसके अलावा नौकरी छोड़ने या सेवा समाप्त होने की स्थिति में कर्मचारी का बकाया भुगतान दो दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। वेतन देने से पहले कर्मचारियों को वेतन पर्ची उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
महिला और पुरुष कर्मचारियों को समान वेतन
नई संहिता में समान काम के लिए महिला और पुरुष कर्मचारियों को बराबर वेतन देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा संविदा कर्मचारियों के वेतन, ओवरटाइम और बोनस भुगतान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी। अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो उसके लंबित भुगतान की राशि उसके द्वारा नामित व्यक्ति या नामांकन न होने की स्थिति में कानूनी उत्तराधिकारी को दी जाएगी।
नई व्यवस्था में मजदूरी, वेतन भुगतान, समान वेतन और बोनस से जुड़े पुराने नियमों को एक साथ जोड़ा गया है। इसके तहत वेतन से की जाने वाली कानूनी कटौती की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत तय की गई है। साथ ही कर्मचारियों के कुल वेतन में मूल वेतन का हिस्सा 50 प्रतिशत रखने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस संहिता से श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा मजबूत होगी और वेतन संबंधी नियमों को लागू करना अधिक आसान होगा।