उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ(Kedarnath) धाम यात्रा मार्ग पर शुक्रवार दोपहर एक दुखद दुर्घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। जंगलचट्टी क्षेत्र के समीप चिरबासा हेलीपेड के पास अचानक पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर और बोल्डर गिरने लगे। उस समय मार्ग से श्रद्धालुओं और घोड़ों की आवाजाही जारी थी। देखते ही देखते एक घोड़ा उस पर सवार यात्री और घोड़ा संचालक इन गिरते पत्थरों की चपेट में आ गए।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां तत्काल सक्रिय हो गईं। जंगलचट्टी में तैनात पुलिस बल, डीडीआरएफ, वाईएमएफ तथा अन्य राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचे। टीमों ने बिना समय गंवाए मलबे और चट्टानों के बीच फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। राहतकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में बचाव कार्य को अंजाम दिया और प्रभावित लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया। हालांकि हादसा इतना गंभीर था कि एक व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका।
घोड़ा संचालक की मौके पर गई जान
इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले घोड़ा संचालक की पहचान देवेश सिंह के रूप में हुई है। वह रुद्रप्रयाग जिले के बड़ासू क्षेत्र का निवासी था। देवेश लंबे समय से केदारनाथ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को घोड़े के माध्यम से आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराता था और इसी कार्य से अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। दुर्भाग्यवश, अचानक हुए पत्थर गिरने की घटना में वह सीधे बोल्डरों की चपेट में आ गया जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। हादसे की खबर मिलते ही उसके परिवार और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
घटना के समय मौजूद लोगों के अनुसार सब कुछ कुछ ही सेकंड में घटित हो गया। पहाड़ी से अचानक तेज आवाज के साथ पत्थर गिरने शुरू हुए, जिससे वहां मौजूद लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थान पर जाने का अवसर नहीं मिल पाया। यात्रियों और स्थानीय लोगों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मार्ग पर चल रहे कई लोगों ने जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने की कोशिश की, लेकिन घोड़ा और उसका संचालक सीधे पत्थरों की चपेट में आ गए।
प्रशासन ने शुरू की आगे की कार्रवाई
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने मृतक के परिजनों को सूचना दे दी है। पुलिस द्वारा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। साथ ही संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर्वतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है जहां मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भूस्खलन तथा पत्थर गिरने की घटनाओं का खतरा बना रहता है।
ऐसे में प्रशासन लगातार यात्रियों से सतर्क रहने और निर्धारित सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है। यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर पर्वतीय मार्गों पर मौजूद प्राकृतिक जोखिमों की याद दिलाता है और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।