Delhi-NCR में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने लगभग 9,585 करोड़ रुपये की एक नई योजना को मंजूरी दी है, जिसका मकसद क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने भारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना है। इस योजना के तहत करीब 2 लाख से अधिक पुराने ट्रकों और बसों को सड़कों से बाहर किया जाएगा और उनकी जगह पर्यावरण के अनुकूल नए वाहन लाए जाएंगे।
इस योजना का मुख्य लक्ष्य दिल्ली-NCR में स्मॉग और जहरीली हवा की समस्या को कम करना है। सरकार चाहती है कि पुराने डीजल वाहनों, खासकर BS-4 और उससे पुराने मॉडल्स को हटाकर उनकी जगह BS-6 मानकों वाले या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाए। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि क्षेत्र में हरियाली और स्वच्छ परिवहन प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।
वाहन मालिकों को मिलने वाले फायदे
इस योजना को आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने वाहन मालिकों के लिए कई तरह के आर्थिक लाभ भी तय किए हैं। अगर कोई ट्रक या बस मालिक अपने पुराने वाहन को स्क्रैप करता है, तो उसे बदले में कई सुविधाएं मिल सकती हैं। इनमें ईंधन वाउचर, रोड टैक्स में छूट और बैंक लोन पर राहत शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ वाहन निर्माता कंपनियां नए इलेक्ट्रिक या BS-6 वाहनों की खरीद पर लगभग 8 प्रतिशत तक की छूट भी दे सकती हैं। साथ ही, वाहन खरीदने के लिए लिए गए लोन पर सरकार की ओर से 5 साल तक ब्याज में सब्सिडी देने का भी प्रस्ताव है जिससे कुल वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा।
भारी वाहनों पर क्यों है खास ध्यान?
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-NCR में प्रदूषण फैलाने में ट्रकों और बसों की भूमिका बहुत अधिक है। हालांकि इनकी संख्या कुल वाहनों का छोटा हिस्सा है, लेकिन ये PM 2.5 जैसे खतरनाक कणों और नाइट्रोजन ऑक्साइड के बड़े उत्सर्जक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुराने भारी वाहन नए वाहनों की तुलना में कई गुना अधिक धुआं छोड़ते हैं जिससे वायु गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है। इसी कारण सरकार ने सबसे पहले भारी वाहनों को लक्ष्य बनाकर इस योजना की शुरुआत की है ताकि तेजी से प्रदूषण स्तर में सुधार लाया जा सके।
क्या हैं स्क्रैपिंग और बिक्री के नियम ?
इस योजना को लागू करने के लिए सरकार ने स्क्रैपिंग नियमों को भी सख्त बनाया है। पुराने BS-3 और उससे पहले के वाहनों को अनिवार्य रूप से स्क्रैप करना होगा। वहीं BS-4 वाहनों के मालिकों को विकल्प दिया जाएगा कि वे चाहें तो अपने वाहन को स्क्रैप करें या फिर दिल्ली-NCR से बाहर उन क्षेत्रों में बेच दें जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के दायरे में नहीं आते। सरकार और राज्य मिलकर इस योजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करेंगे ताकि स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा दिया जा सके और लोगों को बेहतर हवा मिल सके।