आरा के नवादा थाना क्षेत्र स्थित धोबी घटवा चौराहे से सामने आई तस्वीरों ने लोगों को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। अरवल जिले के बलिदाद निवासी और मोटरसाइकिल सवार राकेश कुमार एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए और दर्द से कराहते हुए, ज़िंदगी और मौत के बीच झूलते रहे।
टक्कर के बाद राकेश सड़क किनारे पड़े रहे और आस-पास के लोगों ने डायल 102 पर कॉल किया। इसके बावजूद लगभग 20 मिनट तक कोई एंबुलेंस नहीं आई। स्थिति बिगड़ती देख उन्होंने डायल 112 पर भी संपर्क किया, लेकिन राहत नहीं मिली। हर गुजरते पल के साथ घायल की सांसें भारी होती गईं और उम्मीदें टूटती गईं।
इंसानियत ने संभाला मोर्चा
जब सरकारी सिस्टम मदद के लिए नदारद रहा, तब स्थानीय लोगों ने ठेला मंगाया और घायल राकेश कुमार को उसी पर लिटाकर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। यह दृश्य दिखाता है कि कागजों पर मजबूत दिखने वाली व्यवस्था जमीन पर अक्सर नाकाम साबित होती है।
सिस्टम पर सवाल
यह घटना केवल एक युवक की पीड़ा नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र और आपातकालीन सेवाओं पर सवाल खड़ा करती है। आज भी आम आदमी की जान कई बार सरकारी दावों से नहीं, बल्कि हालात और स्थानीय इंसानियत पर टिकी रहती है। आरा की यह तस्वीर यही संदेश देती है कि संकट की घड़ी में इंसानियत ही सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है।
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