PM Modi Europe Visit: PM नरेंद्र मोदी अगले महीने 15 से 20 मई के बीच यूरोप के चार देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर जाएंगे। इस यात्रा में नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं। इस दौरान व्यापार, सुरक्षा सहयोग, वैश्विक संघर्षों और ऊर्जा आपूर्ति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
इंडिया-नॉर्डिक समिट में होंगे शामिल
इस दौरे का सबसे अहम पड़ाव नॉर्वे में होने वाला तीसरा इंडिया-नॉर्डिक समिट होगा। इसमें भारत के साथ डेनमार्क, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड के नेता हिस्सा लेंगे। इससे पहले यह समिट 2018 में स्वीडन और 2022 में डेनमार्क में आयोजित हो चुका है, जिससे इस मंच की अहमियत और बढ़ गई है।
UAE में रुक सकते हैं PM मोदी
दौरे की शुरुआत या अंत में प्रधानमंत्री का दुबई (UAE) में कुछ समय के लिए रुकना भी संभव है। यहां वह राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सहयोग और सितंबर में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर बातचीत कर सकते हैं।
नीदरलैंड में किन चीजों को लेकर होगी बात
नीदरलैंड यात्रा के दौरान व्यापार, हरित अर्थव्यवस्था, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों पर बातचीत होगी। खासतौर पर सेमीकंडक्टर सेक्टर में सहयोग को लेकर बड़ा समझौता होने की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में आइंडहोवन दौरे और ASML द्वारा भारत में सपोर्ट ऑफिस खोलने की घोषणा ने इस सहयोग को नई दिशा दी है।
स्वीडन और इटली से इन मुद्दों पर होगी चर्चा
स्वीडन में नवाचार, तकनीक और व्यापारिक साझेदारी की समीक्षा की जाएगी, जबकि इटली दौरे के दौरान व्यापार, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत होने की संभावना है, जो अगले साल लागू हो सकता है।
ऊर्जा और वैश्विक तनाव पर होगी बातचीत
दौरे के दौरान ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तनाव भी प्रमुख मुद्दे रहेंगे। खासकर ईरान-अमेरिका तनाव के चलते सप्लाई चेन और व्यापारिक बाधाओं पर चर्चा की जाएगी। भारत पहले से ही ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।
पिछली बार रद्द हुआ था दौरा
जैसा की आप जानते ही होंगे कि, पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद पाकिस्तान में हुई सैन्य कार्रवाई के कारण प्रधानमंत्री का प्रस्तावित यूरोप दौरा रद्द कर दिया गया था। इस बार यह यात्रा भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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