AI-Driven Traffic Control: बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या तेजी से बढ़ रही है। हर रोज लोग जाम में घंटों तक फंसे खड़े रहते हैं, लेकिन अब इस समस्या से राहत दिलाने के लिए एक नई टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है। इसी को देखते हुए अहमदाबाद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लागू किया है, जो ट्रैफिक को खुद संभालने में सक्षम है।
कैसे कंट्रोल होगा ट्रैफिक?
शहर में लागू किए गए इस सिस्टम को Adaptive Traffic Control System कहा जाता है। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर करीब 10 प्रमुख चौराहों पर लगाया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक ट्रैफिक सिग्नल की तरह तय समय पर नहीं चलता, बल्कि मौजूदा ट्रैफिक स्थिति के अनुसार खुद फैसले लेता है।
कैसे काम करता है AI सिस्टम?
इस स्मार्ट सिस्टम में हाई-टेक कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं, जो सड़कों पर वाहनों की संख्या, उनकी गति और ट्रैफिक की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं। यह सारी जानकारी तुरंत प्रोसेस होकर सिस्टम को यह तय करने में मदद करती है कि किस दिशा में सिग्नल को ज्यादा समय तक हरा रखा जाए और कहां जल्दी बदला जाए। उदहारण के तौर पर, यदि किसी एक सड़क पर वाहनों की संख्या ज्यादा है और दूसरी तरफ ट्रैफिक कम है, तो यह सिस्टम खुद ही भीड़ वाली साइड को ज्यादा समय देता है। इससे वाहनों का दबाव तेजी से कम होता है और जाम लगने की संभावना कम होती जाती है।
पुराने सिस्टम से कितना अलग
पहले ट्रैफिक सिग्नल तय समय पर चलते थे, जैसे 60 सेकंड ग्रीन और 30 सेकंड रेड, चाहे सड़क खाली हो या भरी हुई। इस वजह से कई बार लोगों को अनावश्यक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब AI आधारित सिस्टम में सिग्नल का समय हर पल बदल सकता है, जिससे ट्रैफिक का संचालन ज्यादा प्रभावी हो जाता है। इस नई तकनीक से न सिर्फ ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि लोगों का समय भी बचेगा और वाहनों का ईंधन खर्च भी घटेगा। जब गाड़ियां बिना रुके सुचारु रूप से चलेंगी, तो प्रदूषण में भी कमी आएगी। इस तरह यह सिस्टम पर्यावरण के लिए भी लाभदायक साबित हो सकता है।
भविष्य में और होगा एडवांस
आगे चलकर इस सिस्टम को और एडवांस बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता खाली करना या विशेष परिस्थितियों में पहले से ट्रैफिक मैनेज करना संभव होगा। अभी इस तकनीक को ट्रायल के रूप में लागू किया गया है, ताकि ये कितनी सक्षम है इसका अंदाजा लगाया जा सके। यदि यह सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे अहमदाबाद में लागू किया जाएगा और अन्य शहर भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
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