US-Iran Tensions: ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने समृद्ध यूरेनियम का भंडार किसी भी हाल में दूसरे देश को नहीं सौंपेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि तेहरान इस मुद्दे पर सहमत हो गया है।
ट्रंप के दावे पर ईरान का आया बयान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत में यूरेनियम ट्रांसफर का मुद्दा कभी शामिल ही नहीं था। उन्होंने सरकारी टीवी पर स्पष्ट कहा कि ‘समृद्ध यूरेनियम कहीं भी ट्रांसफर नहीं होगा।’
ट्रंप का क्या था बयान
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था कि अमेरिका को B2 बमवर्षकों के हमलों के बाद ‘परमाणु धूल’ मिल सकती है। उनका संकेत कथित रूप से उन हमलों की ओर था, जिनमें दफन किए गए यूरेनियम तक पहुंच की बात कही गई।
बातचीत का बदला फोकस
ईरान ने बताया कि पहले वार्ता का केंद्र परमाणु कार्यक्रम था, लेकिन अब प्राथमिकता युद्ध को समाप्त करना है। साथ ही, देश ने प्रतिबंध हटाने और युद्ध के दौरान हुए नुकसान के मुआवजे को अहम मुद्दा बताया।
20 अरब डॉलर का प्रस्ताव
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते पर चर्चा हुई है, जिसमें अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए 20 अरब डॉलर जारी कर सकता है। इसके बदले ईरान से यूरेनियम भंडार छोड़ने की अपेक्षा की जा रही थी, जिसे तेहरान ने नकार दिया।
ईरान के पास कितना यूरेनियम
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के मुताबिक जून 2025 में अमेरिकी हमलों से पहले ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम 60% तक समृद्ध यूरेनियम था। यह 2015 के परमाणु समझौते की 3.67% सीमा से काफी ज्यादा है।
निरीक्षण पर रोक
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने प्रभावित परमाणु स्थलों पर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों की एंट्री पर रोक लगा दी है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करना चाहता। उसका दावा है कि वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चलाने का अधिकार रखता है।
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