आज से संसद के 3 दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत हो चुकी है, इस विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) समेत 3 विधेयक पेश किए गए। अमित शाह ने गुरुवार को संसद के विशेष सत्र के दौरान स्पष्ट कहा कि धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का आरक्षण संविधान के खिलाफ है और ऐसा प्रावधान भारत में लागू नहीं किया जा सकता। यह बयान महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े विधेयकों पर लोकसभा में हुई तीखी बहस के दौरान सामने आया।
संसद में क्यों उठा आरक्षण का मुद्दा
लोकसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कुछ समुदायों, खासकर मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग उठाई। इस पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि भारतीय संविधान धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं देता।
बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव ने सदन में सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं देश की आबादी का हिस्सा नहीं हैं और उन्हें प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिलना चाहिए। इस पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। साथ ही अमित शाह ने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर इनका बस चले तो ये लोग घर को भी जाति में बांट दे।
अमित शाह ने सदन में कहा कि:
धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है।
सरकार सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के तहत काम कर रही है।
आरक्षण केवल संविधान में तय श्रेणियों (जैसे SC, ST आदि) के आधार पर ही दिया जा सकता है।
उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाने का आरोप भी लगाया और कहा कि अगर कोई पार्टी चाहती है तो अपने चुनावी टिकट किसी भी समुदाय को दे सकती है, लेकिन सरकार संविधान के नियमों के अनुसार ही फैसले लेगी।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा बड़ा संदर्भ
संसद में इस समय महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया और नए परिसीमन आयोग के गठन को लेकर व्यापक बहस चल रही है। सरकार का कहना है कि जनगणना और परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण पूरी तरह लागू किया जाएगा।

