भारत की रक्षा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह कदम भारतीय वायुसेना (IAF) के आधुनिकीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
DAC क्या है ?
डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल भारत सरकार की सर्वोच्च रक्षा खरीद निकाय है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं। इसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। यह परिषद नए हथियारों, विमानों और सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी देती है। अंतिम मंजूरी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) देती है।
क्यों जरूरी हैं नए राफेल?
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल जेट्स हैं, जो 2016 के समझौते के तहत खरीदे गए थे और 2022 तक डिलीवर हो चुके हैं। IAF को आदर्श रूप से 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है, जबकि अभी यह संख्या लगभग 29 है। नए राफेल जेट्स पुराने मिग-21 और अन्य विमानों की जगह लेंगे।
राफेल मल्टी-रोल फाइटर विमान है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन हमलों के साथ लंबी दूरी की मेटियोर और स्कैल्प मिसाइलों से लैस हो सकता है। इसे सामरिक और परमाणु भूमिका में भी तैनात किया जा सकता है।
‘मेक इन इंडिया’ और आगे की प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक 18 जेट्स तैयार अवस्था में आएंगे, जबकि शेष का उत्पादन भारत में साझेदारी मॉडल के तहत किया जाएगा। इससे तकनीकी हस्तांतरण और रोजगार बढ़ने की संभावना है। DAC की मंजूरी के बाद प्रस्ताव CCS के पास जाएगा। हालांकि इन जेट्स की डिलीवरी में 5 से 7 वर्ष लग सकते हैं।